ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम जारी किए हैं। Persian Gulf Strait Authority के मुताबिक अब यहां से गुजरने वाले जहाजों को ईरान की अनुमति लेनी होगी। नियम तोड़ने वाले जहाजों को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। इसके बाद भी अगर कोई जहाज पहुंचता है तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है या सामान समेत जब्ती की कार्रवाई हो सकती है।
शिपिंग कंपनियों पर बढ़ा दबाव
ईरान ने माल भेजने वाली कंपनियों को जहाज किराए पर लेने से पहले ब्लैकलिस्ट की जांच करने की सलाह दी है। चेतावनी दी गई है कि ब्लैकलिस्ट जहाजों से सामान नहीं भेजा जाए। इतना ही नहीं, ऐसे जहाजों के साथ शिप-टू-शिप ट्रांसफर करने वाले जहाजों पर भी कार्रवाई हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के लिए होर्मुज का रास्ता और संवेदनशील हो गया है।
आर्थिक संकट से जूझ रहा ईरान
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का दबाव लगातार बना हुआ है और देश गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। रिपोर्टों में ईरानी मुद्रा रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने का दावा किया गया है। महंगाई ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। दवाओं और जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की खबरें हैं, जिससे लोगों की खरीद क्षमता प्रभावित हुई है।
होर्मुज को कमाई का बड़ा जरिया बनाने की कोशिश
ईरान के लिए होर्मुज सिर्फ रणनीतिक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि आर्थिक दबाव बनाने का हथियार भी बनता दिख रहा है। शिपिंग कंपनियों से शुल्क वसूलकर ईरान बड़ी कमाई करना चाहता है। इसके साथ ही वह इस रास्ते पर अपना नियंत्रण बढ़ाकर अमेरिकी प्रतिबंधों के असर को कम करने की कोशिश कर सकता है। यही वजह है कि होर्मुज को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है।
अमेरिका के प्रतिबंधों को उल्टा करने की रणनीति
ईरान का दांव सिर्फ पैसा कमाने तक सीमित नहीं माना जा रहा। रणनीति यह भी हो सकती है कि अमेरिका के प्रतिबंधों का असर उन्हीं देशों और कंपनियों पर पड़े, जो ईरान के खिलाफ दबाव अभियान में शामिल हैं। ईरान की ओर से यह संकेत भी दिए गए हैं कि उसके आर्थिक और रणनीतिक हितों पर गंभीर हमला हुआ तो वह इसे युद्ध की कार्रवाई मान सकता है।
आगे बढ़ा तो टकराव का खतरा
होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बढ़ने से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ तनाव और बढ़ सकता है। अगर शिपिंग कंपनियों पर दबाव, जहाजों की जब्ती या समुद्री रोक जैसी कार्रवाई तेज होती है तो वैश्विक तेल सप्लाई और व्यापार पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान आर्थिक दबाव झेलते हुए होर्मुज को कितना प्रभावी हथियार बना पाता है।