थकान या लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने के बाद कई लोग गर्दन चटकाते हैं। खासकर मोबाइल, लैपटॉप या डेस्क पर घंटों काम करने वालों में यह आदत आम है। गर्दन चटकाने पर आने वाली आवाज को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह आवाज आमतौर पर गर्दन के जोड़ों के अंदर दबाव में बदलाव या गैस के छोटे बुलबुले बनने की वजह से आती है।
कभी-कभार गर्दन चटकाना आमतौर पर नुकसानदायक नहीं
अगर गर्दन कभी-कभार सामान्य तरीके से चटकती है और इसके साथ दर्द, सूजन, सुन्नपन या कमजोरी जैसी परेशानी नहीं है, तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती। कई लोगों में जोड़ों की सामान्य गतिविधि के दौरान भी ऐसी आवाज आ सकती है। यानी सिर्फ चटकने की आवाज आने का मतलब यह नहीं है कि गर्दन में कोई गंभीर समस्या हो गई है।
बार-बार चटकाने की आदत बन सकती है परेशानी
जानबूझकर बार-बार गर्दन को मोड़कर या तेज झटके से चटकाना सही आदत नहीं मानी जाती। ऐसा लगातार करने से गर्दन की मांसपेशियों, लिगामेंट्स और जोड़ों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। इससे दर्द, जकड़न या असहजता बढ़ सकती है। खासतौर पर गर्दन को बहुत तेजी से या जोर लगाकर घुमाना नुकसान पहुंचा सकता है।
बार-बार गर्दन चटकाने के पीछे हो सकते हैं ये कारण
अगर आपको बार-बार गर्दन चटकाने की जरूरत महसूस होती है, तो इसके पीछे गलत पोश्चर या लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत हो सकती है। लगातार एक ही मुद्रा में बैठे रहने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ सकता है। ऐसे में चटकाने से थोड़ी देर राहत महसूस हो सकती है, लेकिन समस्या का असली कारण दूर नहीं होता।
इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
अगर गर्दन में लगातार दर्द रहता है या हाथों में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। चक्कर, तेज सिरदर्द या चोट लगने के बाद गर्दन में परेशानी होने पर भी इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण किसी दूसरी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं और जांच जरूरी हो सकती है।
गर्दन चटकाने के बजाय इन आदतों को अपनाएं
गर्दन को बार-बार चटकाने के बजाय बैठने का पोश्चर सही रखें और लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठें। काम के बीच छोटे ब्रेक लें और गर्दन व कंधों को आराम दें। विशेषज्ञ की सलाह से हल्की स्ट्रेचिंग भी मददगार हो सकती है। अगर चटकाने की आदत लगातार बनी हुई है, तो इसके कारण की जांच कराना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।