भारत को आजाद हुए 79 साल हो चुके हैं। इन वर्षों में देश ने अर्थव्यवस्था, लोकतंत्र और खेलों समेत कई क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है। आज भारतीय खिलाड़ी क्रिकेट से लेकर ओलंपिक तक देश का नाम रोशन कर रहे हैं। लेकिन आजादी से पहले भी कुछ खिलाड़ियों ने भारत को बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलताएं दिलाई थीं।
नॉर्मन प्रिचार्ड ने ओलंपिक में भारत को पहला पदक दिलाया
नॉर्मन प्रिचार्ड का नाम भारत के शुरुआती ओलंपिक इतिहास में बेहद खास है। 1875 में कलकत्ता में जन्मे प्रिचार्ड ने 1900 के पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने 200 मीटर स्प्रिंट और 200 मीटर हर्डल्स में दो सिल्वर मेडल जीते। वे भारत के लिए ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी माने जाते हैं।
ध्यान चंद ने हॉकी में भारत का दबदबा बनाया
मेजर ध्यान चंद भारतीय हॉकी के सबसे बड़े नामों में शामिल हैं। उनकी शानदार हॉकी ने भारत को 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक में लगातार तीन गोल्ड मेडल दिलाने में अहम भूमिका निभाई। 1936 के फाइनल में जर्मनी के खिलाफ उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और भारत ने 8-1 से जीत दर्ज की। उनका खेल आज भी भारतीय हॉकी की पहचान है।
सीके नायडू बने भारत के पहले टेस्ट कप्तान
भारत ने अपना पहला टेस्ट मैच 1932 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेला था। इस ऐतिहासिक मुकाबले में टीम की कप्तानी कर्नल सीके नायडू ने की और वे भारत के पहले टेस्ट कप्तान बने। उन्होंने सात टेस्ट मैचों में 350 रन बनाए और नौ विकेट लिए। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनके नाम 11 हजार से ज्यादा रन और 411 विकेट रहे।
लाला अमरनाथ ने डेब्यू में ही रचा इतिहास
लाला अमरनाथ भारतीय क्रिकेट के शुरुआती महान ऑलराउंडरों में गिने जाते हैं। उन्होंने 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया और अपने पहले ही मैच में 118 रन की शानदार पारी खेली। इस प्रदर्शन के साथ वे टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाने वाले पहले भारतीय बने। आजादी के बाद वे भारत के पहले कप्तान भी बने।
रूप सिंह ने हॉकी में बनाया अनोखा रिकॉर्ड
कैप्टन रूप सिंह, मेजर ध्यान चंद के छोटे भाई थे और भारतीय हॉकी के शानदार खिलाड़ियों में शामिल रहे। उन्होंने 1932 लॉस एंजेलेस और 1936 बर्लिन ओलंपिक में गोल्ड जीतने वाली टीम के लिए खेला। 1932 में अमेरिका के खिलाफ उन्होंने अकेले 10 गोल किए थे। यह ओलंपिक के एक मैच में किसी खिलाड़ी के सबसे ज्यादा गोल का रिकॉर्ड बताया जाता है।