15 August की कहानी में छिपा बड़ा राज, आजादी के बाद भारत का तिरंगा सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में फहरा था, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

भारत का मौजूदा तिरंगा 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया था। इससे पहले स्वतंत्रता आंदोलन के झंडे में बीच में चरखा बना होता था। लेकिन चरखे की वजह से झंडे के दोनों तरफ डिजाइन एक जैसा नहीं दिखता था। इसलिए चरखे की जगह अशोक चक्र को अपनाया गया और तिरंगे का मौजूदा स्वरूप तय हुआ।

15 अगस्त दोनों देशों की असली तारीख

बहुत कम लोग जानते हैं कि मूल रूप से भारत और पाकिस्तान, दोनों के लिए 15 अगस्त 1947 ही स्वतंत्रता की तारीख थी। ब्रिटिश संसद ने Indian Independence Act 1947 में साफ लिखा था कि 15 अगस्त से भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र डोमिनियन होंगे। यानी पाकिस्तान को कानूनी तौर पर 14 अगस्त को आज़ादी नहीं मिली थी।

फिर पाकिस्तान 14 अगस्त क्यों मनाता है?

पाकिस्तान में 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने की शुरुआत बाद में हुई। 1947 में सत्ता हस्तांतरण का समारोह कराची में 14 अगस्त को रखा गया, क्योंकि माउंटबैटन को अगले दिन दिल्ली में भी कार्यक्रम करना था। इसके अलावा 27वीं रमज़ान की रात को लेकर भी उस समय धार्मिक महत्व माना जा रहा था। जून 1948 में पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मानने का फैसला किया।

भारत-पाकिस्तान का बॉर्डर तब तक साफ नहीं था

आजादी के समय भी पंजाब और बंगाल का अंतिम बंटवारा सार्वजनिक नहीं हुआ था। सर सिरिल रैडक्लिफ ने इन दोनों क्षेत्रों की सीमा तय की, लेकिन उसका ऐलान 17 अगस्त 1947 को किया गया। यानी 15 अगस्त को आजादी के जश्न के दौरान पंजाब और बंगाल के लाखों लोगों को यह तक नहीं पता था कि उनका इलाका भारत में है या पाकिस्तान में।

भारत में तिरंगा 15 अगस्त को क्यों नहीं फहराया गया?

14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि को भारत में सत्ता हस्तांतरण हुआ। नेहरू ने अपना प्रसिद्ध “Tryst with Destiny” भाषण दिया और कार्यक्रम में तिरंगा राजेंद्र प्रसाद को सौंपा गया। लेकिन रात में झंडा नहीं फहराया गया, क्योंकि उस समय सामान्य परंपरा के अनुसार सूर्यास्त के बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराने की व्यवस्था नहीं थी। संसद और दूसरे स्थानों पर सुबह तिरंगा फहराने का कार्यक्रम तय हुआ।

दुनिया में सबसे पहले तिरंगा कहां फहरा?

यहीं कहानी सबसे दिलचस्प हो जाती है। भारत के विदेशों में मौजूद ब्रिटिश-भारतीय मिशन अब स्वतंत्र भारत के दूतावास बन चुके थे और उन्हें भी सुबह तिरंगा फहराने का निर्देश मिला था। भारत से करीब साढ़े चार घंटे आगे होने के कारण ऑस्ट्रेलिया में सुबह पहले हुई। कैनबरा स्थित भारतीय हाई कमीशन में हाई कमिश्नर सर रघुनाथ पुरुषोत्तम परांजपे ने आधिकारिक तौर पर तिरंगा फहराया और “जय हिंद” कहा। इस तरह आजाद भारत का तिरंगा पहली बार भारत की धरती पर नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में आधिकारिक रूप से फहरा था।

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Author: The Hindi Post