India में फैटी लिवर का खतरा बढ़ा, करोड़ों लोग चपेट में, डायबिटीज और मोटापा बने बड़ी वजह, एक्सपर्ट्स ने चेताया

भारत में फैटी लिवर की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। नए हेल्थ रिसर्च के आंकड़ों ने इस समस्या को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, फैटी लिवर को अब ज्यादा सटीक रूप से MASLD यानी मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिजीज कहा जाता है। अनुमान है कि भारत की करीब 16 से 32 फीसदी आबादी इससे प्रभावित हो सकती है। यह संख्या लगभग 12 करोड़ लोगों तक पहुंच सकती है।

वयस्कों के साथ बच्चों पर भी असर

26 हजार से ज्यादा लोगों पर हुई 50 स्टडी के विश्लेषण में सामने आया कि भारत में करीब 38.6 फीसदी वयस्कों को नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज है। डायबिटीज या मोटापे से जूझ रहे लोगों में यह आंकड़ा बढ़कर 52.8 फीसदी हो जाता है। बच्चों में भी स्थिति चिंताजनक है। रिसर्च के अनुसार, करीब 35.4 फीसदी बच्चों में फैटी लिवर पाया गया, जबकि मोटापे से ग्रस्त बच्चों में यह दर 63.4 फीसदी तक पहुंच गई।

बैठकर काम करने वालों पर ज्यादा खतरा

फैटी लिवर किसी भी उम्र और वर्ग के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, लंबे समय तक बैठकर काम करने और कम शारीरिक गतिविधि वाली लाइफस्टाइल के कारण IT सेक्टर में काम करने वालों पर इसका खतरा ज्यादा बताया गया है। कर्नाटक और उत्तर भारत में हुई रिसर्च में शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों में भी बीमारी के काफी मामले सामने आए हैं। पेट के आसपास ज्यादा चर्बी, डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं।

बीमारी की पहचान में अब भी कमी

फैटी लिवर के मामले बढ़ने के बावजूद इसकी पहचान और इलाज को लेकर हेल्थ सिस्टम में अभी कई कमियां हैं। इस साल की शुरुआत में लिवर विशेषज्ञों के देशव्यापी सर्वे में भी ऐसी चुनौतियां सामने आईं। विशेषज्ञों का मानना है कि बीमारी का बढ़ता बोझ जिस तेजी से सामने आ रहा है, उसके मुकाबले जांच और इलाज की व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।

डायबिटीज और मोटापा बड़ी वजह

टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और शारीरिक गतिविधि की कमी फैटी लिवर के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, किसी व्यक्ति में इन बीमारियों में से एक की जांच के दौरान लिवर से जुड़ी समस्या की भी जांच की जा सकती है। इससे बीमारी की शुरुआती पहचान में मदद मिल सकती है और समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं।

लाइफस्टाइल सुधारना सबसे जरूरी

फैटी लिवर के खतरे को कम करने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना अहम है। संतुलित डाइट, नियमित एक्सरसाइज और वजन को नियंत्रित रखना इसके लिए महत्वपूर्ण कदम हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन बदलावों से सिर्फ फैटी लिवर ही नहीं, बल्कि डायबिटीज, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी कई समस्याओं का खतरा भी कम किया जा सकता है। समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में इस बीमारी का बोझ और बढ़ सकता है।

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Author: The Hindi Post