बलूचिस्तान के इतिहास में 11 अगस्त की तारीख बेहद अहम मानी जाती है। 1947 में इसी दिन कलात रियासत ने खुद को आजाद देश घोषित किया था। उस समय भारत और पाकिस्तान अस्तित्व में भी नहीं आए थे। कलात के खान का मानना था कि उनकी रियासत का ब्रिटिश सरकार से अलग समझौता था, इसलिए अंग्रेजों के जाने के बाद कलात एक स्वतंत्र देश रहेगा।
कलात और खान का था अलग दर्जा
कलात के अधीन खारान, लास बेला और मकरान जैसी छोटी रियासतें थीं। वहीं क्वेटा के आसपास का क्षेत्र ब्रिटिश सरकार के सीधे नियंत्रण में था। कलात के खान ने अंग्रेजों से बातचीत के लिए मोहम्मद अली जिन्ना को अपना कानूनी सलाहकार बनाया था। उस समय जिन्ना कलात की स्वतंत्रता के पक्ष में ब्रिटिश सरकार से बातचीत कर रहे थे।
आजादी के बाद पाकिस्तान ने बदला रुख
भारत और पाकिस्तान के बनने के बाद कलात ने पाकिस्तान में शामिल होने से इनकार कर दिया। 11 अगस्त को हुए समझौते के तहत कलात को स्वतंत्र माना गया, जबकि रक्षा, विदेश और संचार जैसे मुद्दों पर आगे बातचीत होनी थी। लेकिन बाद में पाकिस्तान ने कलात पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया। जिन्ना ने भी खान को पाकिस्तान में शामिल होने के लिए मनाने की कोशिश की।
छोटी रियासतों पर दबाव, कलात चारों तरफ घिरा
कलात की संसद ने भी पाकिस्तान में शामिल होने के खिलाफ फैसला लिया। इसके बाद पाकिस्तान ने खारान, मकरान और लास बेला जैसी छोटी रियासतों पर दबाव बनाया। मार्च 1948 तक ये सभी पाकिस्तान में शामिल हो गईं। इस तरह कलात चारों तरफ से पाकिस्तान से घिर गया। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने कलात पर भी दबाव बढ़ा दिया और आखिरकार खान को विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने पड़े।
27 मार्च की AIR रिपोर्ट ने मचाया तहलका
इस कहानी में ऑल इंडिया रेडियो यानी आकाशवाणी की एक रिपोर्ट सबसे ज्यादा विवादित रही। 27 मार्च 1948 को AIR पर खबर प्रसारित हुई कि कलात के खान ने भारत से संपर्क कर भारत में शामिल होने की कोशिश की थी। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच गई। खान ने इस खबर को गलत बताया। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी इसका खंडन करते हुए कहा कि कलात ने भारत में शामिल होने के लिए कोई संपर्क नहीं किया था।
AIR की रिपोर्ट आज भी बनी हुई है रहस्य
कलात 11 अगस्त 1947 से 27 मार्च 1948 तक ही स्वतंत्र रहा। इसके बाद वह पाकिस्तान का हिस्सा बन गया। लेकिन आज भी बड़ा सवाल यही है कि आकाशवाणी पर कलात को लेकर वह रिपोर्ट आई कहां से थी और उसे किसने प्रसारित कराया था। नेहरू के खंडन के बावजूद इस रिपोर्ट का स्रोत पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका। यही वजह है कि बलूचिस्तान के इतिहास में 11 अगस्त और AIR की वह रिपोर्ट आज भी एक रहस्यमयी अध्याय मानी जाती है।