ईरान और ओमान के बीच रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर एक संभावित समझौते की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के ट्रैफिक को मैनेज करने के लिए किसी नई व्यवस्था पर पहुंचने के करीब हैं। अगर यह डील होती है, तो इसका असर सिर्फ ईरान और ओमान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर पड़ सकता है।
दो अलग रूट से ट्रैफिक संभालने की तैयारी
बताया जा रहा है कि प्रस्तावित व्यवस्था में होर्मुज से गुजरने वाले समुद्री यातायात को दो अलग-अलग रूट के जरिए संभाला जा सकता है। एक रूट फारस की खाड़ी की ओर उत्तरी हिस्से से और दूसरा ओमान के तट के साथ दक्षिणी हिस्से से हो सकता है। हालांकि, इस संभावित व्यवस्था की पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है और यह भी साफ नहीं है कि जहाजों से किसी तरह की फीस ली जाएगी या नहीं।
मार्क एस्पर ने जताई गंभीर चिंता
अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने इस संभावित व्यवस्था पर चिंता जताई है। Fox News के कार्यक्रम ‘America Reports’ में उन्होंने कहा कि अगर ईरान और ओमान को होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के ट्रैफिक को नियंत्रित या संचालित करने की भूमिका मिलती है, तो यह अमेरिका के लिए ‘बहुत बुरा नतीजा’ हो सकता है। उनके मुताबिक, इससे दोनों देशों का जलमार्ग पर प्रभाव काफी बढ़ सकता है।
अमेरिका की भूमिका पर भी बड़ा सवाल
एस्पर ने इस संभावित समझौते में अमेरिका की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वह बातचीत में व्यक्तिगत रूप से शामिल हैं। दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका की सीधी भागीदारी से इनकार किया है। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कोई वास्तविक डील हो रही है या सिर्फ बातचीत चल रही है।
तेल के लिए क्यों बेहद अहम है होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले कच्चे तेल और दूसरे ऊर्जा उत्पादों का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के बाजारों तक पहुंचता है। इसलिए यहां समुद्री आवाजाही में किसी भी तरह की रुकावट या नए नियंत्रण का असर तेल की सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ सकता है।
दुनिया की नजर संभावित डील पर
अगर ईरान और ओमान होर्मुज के समुद्री ट्रैफिक को लेकर नई व्यवस्था पर सहमत होते हैं, तो इसका असर वैश्विक स्तर पर देखने को मिल सकता है। अमेरिका और दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस जलमार्ग की सुरक्षा और निर्बाध आवाजाही को बेहद अहम मानती हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देशों के बीच वास्तव में कोई समझौता होने जा रहा है और उसमें अमेरिका की भूमिका कितनी है।