दिल की धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज होने पर रक्त प्रवाह सामान्य करने के लिए स्टेंट लगाया जाता है। कई लोग मानते हैं कि स्टेंट लगने के बाद हार्ट अटैक का खतरा हमेशा के लिए खत्म हो जाता है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यह पूरी तरह सही नहीं है। स्टेंट सिर्फ बंद या संकरी धमनी को खोलता है, जबकि हृदय रोग की मूल समस्या बनी रह सकती है।
दोबारा क्यों हो सकता है हार्ट अटैक?
अगर मरीज समय पर दवाएं नहीं लेता, धूम्रपान करता है, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित नहीं रखता, तो दूसरी धमनियों में भी ब्लॉकेज बन सकती है। ऐसी स्थिति में दोबारा हार्ट अटैक आने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए स्टेंट के बाद भी लापरवाही करना नुकसानदायक हो सकता है।
डॉक्टर ने क्या बताया?
आकाश हेल्थ केयर की कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सुक्रीति भल्ला के अनुसार, कुछ मामलों में स्टेंट के अंदर दोबारा ब्लॉकेज या खून का थक्का भी बन सकता है। हालांकि आधुनिक ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेने से यह खतरा काफी कम हो जाता है। इसलिए इलाज के बाद नियमित देखभाल बेहद जरूरी है।
स्वस्थ जीवनशैली है सबसे जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि स्टेंट हार्ट अटैक का स्थायी इलाज नहीं, बल्कि ब्लड फ्लो बहाल करने का एक प्रभावी तरीका है। मरीज को नियमित दवाएं लेने के साथ संतुलित आहार, रोजाना व्यायाम, वजन नियंत्रण और धूम्रपान से दूरी जैसी अच्छी आदतें अपनानी चाहिए। यही आदतें भविष्य में हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
यदि स्टेंट लगने के बाद भी सीने में दर्द, सांस फूलना, ज्यादा पसीना आना या दर्द का जबड़े, कंधे या बाएं हाथ तक फैलना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसे संकेत हार्ट अटैक की ओर इशारा कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना या अस्पताल पहुंचना जरूरी है।
बचाव के लिए अपनाएं ये आदतें
विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं बंद न करें। धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी रखें, रोज कम से कम 30 से 45 मिनट तक टहलें या व्यायाम करें। साथ ही ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराते रहें। सही इलाज, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर दोबारा हार्ट अटैक का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।