खांसी, हल्का बुखार, सीने में जकड़न या सांस फूलने जैसी समस्याओं को लोग अक्सर मौसम बदलने, एलर्जी या वायरल संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर ये लक्षण कई हफ्तों तक बने रहें या बार-बार लौटें, तो इन्हें हल्के में लेना सही नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक, ये फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं।
एक्सपर्ट ने क्या बताया?
मैक्स पटपड़गंज अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. समीर खत्री के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य श्वसन संक्रमण जैसे लगते हैं। यही वजह है कि कई मरीज समय पर जांच नहीं कराते और बीमारी आगे बढ़ने के बाद ही इसका पता चलता है।
इन लक्षणों पर रखें नजर
अगर तीन सप्ताह से ज्यादा समय तक खांसी बनी रहे, खांसी में खून आए, बार-बार निमोनिया या छाती का संक्रमण हो, सांस जल्दी फूलने लगे, सीने में लगातार दर्द रहे या आवाज बैठ जाए, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लें। इसके अलावा बिना किसी वजह के वजन कम होना और भूख घटना भी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।
सिर्फ स्मोकर्स ही नहीं खतरे में
फेफड़ों का कैंसर केवल धूम्रपान करने वालों को ही नहीं होता। पैसिव स्मोकिंग, बढ़ता वायु प्रदूषण, कुछ औद्योगिक रसायनों के लंबे समय तक संपर्क और परिवार में कैंसर का इतिहास भी इसका खतरा बढ़ा सकते हैं। आज कई ऐसे मरीज भी सामने आ रहे हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया।
समय पर जांच है जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि हर लंबी खांसी का मतलब कैंसर नहीं होता, लेकिन अगर लक्षण 2 से 3 सप्ताह से ज्यादा बने रहें या इलाज के बाद भी ठीक न हों, तो जांच जरूर करानी चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर एक्स-रे, सीटी स्कैन या दूसरी जांच की सलाह दे सकते हैं, जिससे बीमारी का सही कारण समय रहते पता चल सके।
जल्दी पहचान से बेहतर इलाज
आज आधुनिक चिकित्सा के कारण फेफड़ों के कैंसर का इलाज पहले की तुलना में काफी बेहतर हो गया है। अगर बीमारी शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ जाए, तो इलाज के अच्छे परिणाम मिल सकते हैं और मरीज सामान्य व सक्रिय जीवन जी सकता है। इसलिए शरीर में दिखने वाले लगातार बने रहने वाले लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।