अमेरिका के प्रतिबंधों के बाद रूस को अंतरराष्ट्रीय भुगतान करने में लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से रूस अब बांग्लादेश के साथ व्यापार के लिए भारतीय रुपये का इस्तेमाल करना चाहता है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच अलग भुगतान प्रणाली बनाने और ढाका में रूसी बैंक की शाखा खोलने का भी प्रस्ताव दिया गया है। इसका मकसद दोनों देशों के कारोबार को आसान बनाना है।
प्रतिबंधों से बढ़ीं रूस की मुश्किलें
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों ने रूस के बैंकिंग सिस्टम को काफी प्रभावित किया। डॉलर में लेनदेन मुश्किल होने से रूस और बांग्लादेश के बीच व्यापार भी घट गया। भारत पहले से रूस के साथ कुछ कारोबार रुपये में करता है और बांग्लादेश भी भारत के साथ सीमित स्तर पर ऐसा कर चुका है। इसी अनुभव के आधार पर अब रूस बांग्लादेश के साथ भी रुपये में व्यापार बढ़ाना चाहता है।
युद्ध के बाद आधा हुआ व्यापार
युद्ध से पहले बांग्लादेश हर साल रूस को 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा का सामान निर्यात करता था। लेकिन भुगतान में आई दिक्कतों के कारण यह कारोबार काफी घट गया। हालिया वित्त वर्ष में जुलाई से मई के बीच यह आंकड़ा करीब 24.5 करोड़ डॉलर तक सिमट गया। हालांकि बांग्लादेश अब भी रूस से गेहूं, खाद और दूसरी जरूरी वस्तुओं का आयात कर रहा है। नई भुगतान व्यवस्था से दोनों देशों को व्यापार बढ़ने की उम्मीद है।
परमाणु परियोजना भी बनी वजह
रूपपुर परमाणु ऊर्जा परियोजना के लिए बांग्लादेश ने रूस से बड़ा कर्ज लिया था। प्रतिबंधों के कारण उसकी किस्तें समय पर रूस तक नहीं पहुंच पा रही हैं। पहले चीनी युआन में भुगतान की कोशिश हुई, लेकिन बैंक इसमें शामिल नहीं हुए। फिलहाल रकम बांग्लादेश के एक बैंक में जमा है। अब दोनों देश इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए नए भुगतान सिस्टम पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
सस्ता यूरिया और नए कारोबार का प्रस्ताव
रूस ने बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय बाजार से करीब 10 डॉलर प्रति टन सस्ता लगभग 2.8 लाख टन यूरिया उर्वरक देने की पेशकश की है। इसके अलावा गेहूं, सूरजमुखी तेल, चना, पीली मटर और दालों की आपूर्ति बढ़ाने की भी इच्छा जताई है। रूस व्यापार परिषद बनाने, निवेश बढ़ाने और छोटे उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने जैसे कई नए प्रस्ताव भी लेकर आ रहा है।
अहम बैठक पर टिकी हैं उम्मीदें
सितंबर-अक्टूबर में होने वाली रूस-बांग्लादेश संयुक्त आयोग की बैठक में इन सभी प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा होगी। बांग्लादेश इस दौरान तकनीकी सहयोग, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृषि, कौशल विकास और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की बात करेगा। अगर दोनों देश सहमत होते हैं तो भारतीय रुपये के जरिए व्यापार का नया रास्ता खुल सकता है और दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत हो सकते हैं।