भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जो अपनी अनोखी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं। इन्हीं में मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर का नाम भी शामिल है। यह मंदिर पूरे साल बंद रहता है और सिर्फ नाग पंचमी के दिन श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। यही वजह है कि यहां दर्शन करने के लिए भक्तों को पूरे 365 दिन इंतजार करना पड़ता है।
महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर
नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। हर साल नाग पंचमी की रात 12 बजे मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इसके बाद अगले दिन रात 12 बजे तक श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं। 24 घंटे बाद मंदिर के दरवाजे फिर से बंद कर दिए जाते हैं।
बेहद दुर्लभ है यहां की प्रतिमा
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां स्थापित भगवान शिव, माता पार्वती और सात फनों वाले नाग की दुर्लभ प्रतिमा है। मान्यता है कि इस तरह की प्रतिमा दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलती। इसी वजह से नाग पंचमी के दिन यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
तक्षक नाग से जुड़ी मान्यता
पौराणिक कथाओं के अनुसार, नागों के राजा तक्षक ने इसी स्थान पर भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अमरता का वरदान दिया। तभी से यह स्थान तक्षक नाग की तपस्थली माना जाता है और इसकी धार्मिक मान्यता बेहद खास है।
क्यों रहता है मंदिर बंद
धार्मिक मान्यता है कि तक्षक नाग आज भी इस मंदिर में अदृश्य रूप से भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं। उनकी तपस्या में कोई बाधा न आए, इसलिए मंदिर को पूरे साल बंद रखा जाता है। सिर्फ नाग पंचमी के दिन ही भक्तों को यहां पूजा और दर्शन का अवसर मिलता है।
नाग पंचमी पर उमड़ती है भीड़
नाग पंचमी के अवसर पर देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। मंदिर के कपाट खुलते ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं। भक्तों का मानना है कि इस दिन भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन करने से सुख-समृद्धि, परिवार की रक्षा और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।