Brain Health: सिरदर्द समझकर न करें नजरअंदाज, ब्रेन एन्यूरिज्म बन सकता है जानलेवा, समय रहते पहचानना और इलाज बेहद जरूरी है

ब्रेन एन्यूरिज्म दिमाग की किसी रक्त वाहिका (नस) की दीवार कमजोर होने पर बनने वाली सूजन होती है। यह गुब्बारे की तरह फूल जाती है और कई सालों तक बिना किसी परेशानी के रह सकती है। लेकिन अगर यह फट जाए, तो दिमाग में खून बहने लगता है, जो स्ट्रोक का बेहद खतरनाक रूप है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

शुरुआत में दिख सकते हैं ये संकेत

अधिकतर लोगों को शुरुआत में कोई लक्षण महसूस नहीं होते, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है। लेकिन अगर एन्यूरिज्म बड़ा होने लगे, तो सिर के एक तरफ लगातार दर्द, आंख के पीछे दर्द, धुंधला या दो-दो दिखाई देना, एक पलक का झुक जाना, चेहरे में सुन्नपन या कमजोरी और आंख की पुतली का सामान्य से बड़ी दिखना जैसे संकेत नजर आ सकते हैं।

फटने पर तुरंत अस्पताल जाएं

अगर ब्रेन एन्यूरिज्म फट जाए, तो यह मेडिकल इमरजेंसी होती है। अचानक जिंदगी का सबसे तेज सिरदर्द, उल्टी, जी मिचलाना, गर्दन में अकड़न, तेज रोशनी से परेशानी, बेहोशी, भ्रम की स्थिति, दौरे पड़ना, बोलने में दिक्कत या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल पहुंचें। इलाज में देरी से दिमाग को स्थायी नुकसान या जान का खतरा हो सकता है।

किन लोगों में ज्यादा खतरा?

कुछ लोगों में ब्रेन एन्यूरिज्म का खतरा अधिक होता है। हाई ब्लड प्रेशर के मरीज, धूम्रपान करने वाले, ज्यादा शराब पीने वाले, जिनके परिवार में पहले किसी को यह बीमारी रही हो, पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज या कुछ जन्मजात बीमारियों से पीड़ित लोग और 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में इसका जोखिम ज्यादा माना जाता है।

कैसे होती है जांच और इलाज?

ब्रेन एन्यूरिज्म की पहचान के लिए डॉक्टर CT स्कैन, CT एंजियोग्राफी (CTA), MR एंजियोग्राफी (MRA) और डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी (DSA) जैसी जांच करवाते हैं। इलाज एन्यूरिज्म के आकार, स्थान और उसके फटने के खतरे पर निर्भर करता है। इसके लिए माइक्रोसर्जिकल क्लिपिंग, एंडोवैस्कुलर कॉइलिंग और फ्लो-डाइवर्टर जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय

हर ब्रेन एन्यूरिज्म को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके फटने का खतरा जरूर कम किया जा सकता है। ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें, धूम्रपान पूरी तरह छोड़ दें, शराब का सेवन सीमित करें, संतुलित आहार लें और नियमित व्यायाम करें। अगर परिवार में किसी को पहले ब्रेन एन्यूरिज्म हो चुका है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर जांच करवाना भी जरूरी है।

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Author: The Hindi Post