बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़त देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड करीब 5 फीसदी उछलकर 95.47 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो लगभग छह हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड भी 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ 88.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है।
मिडिल ईस्ट बना चिंता की वजह
तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। इसके साथ ही यमन के ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने लाल सागर में तेल ले जाने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी है। इससे दुनिया के अहम तेल सप्लाई रूट प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है और निवेशकों की चिंता भी बढ़ी है।
बाब अल-मंडेब पर बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि बाब अल-मंडेब स्ट्रेट भी अब होर्मुज स्ट्रेट की तरह बड़ा संकट क्षेत्र बन सकता है। यह रास्ता सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बेहद अहम माना जाता है। अगर यहां शिपिंग प्रभावित होती है, तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है और कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
रास्ता बदल रहे हैं तेल टैंकर
हूथी विद्रोहियों की धमकियों के बाद चीन और भारत के लिए सऊदी तेल लेकर जा रहे कुछ टैंकरों ने अपना समुद्री रास्ता बदल दिया। अब कई जहाज रेड सी के जोखिम वाले रास्ते की जगह स्वेज नहर और अफ्रीका के रास्ते सफर कर रहे हैं। इससे शिपिंग लागत बढ़ सकती है और इसका असर तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
अमेरिकी स्टॉक से मिली राहत
दूसरी ओर, अमेरिका से आए शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक पिछले सप्ताह वहां कच्चे तेल और डिस्टिलेट की इन्वेंट्री में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि गैसोलीन का स्टॉक कुछ कम हुआ है। बाजार अब अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार कर रहा है, जिससे आगे की दिशा तय हो सकती है।
आगे क्या रहेगा असर?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है या तेल सप्लाई रूट में कोई बड़ी रुकावट आती है, तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में तेल बाजार पर सभी की नजर बनी रहेगी।