Supreme Court में केंद्र का बड़ा ऐलान! ट्रिब्यूनल सिस्टम बदलने की तैयारी, मानसून सत्र में आ सकता है नया विधेयक

देशभर के न्यायाधिकरणों (ट्रिब्यूनल) में खाली पदों और उनके कामकाज से जुड़े मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बड़ा आश्वासन दिया है। सरकार ने बताया कि नया ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक तैयार करने का काम अंतिम चरण में है। उम्मीद है कि इसे संसद के मौजूदा मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पहले ही कहा था कि देश के ट्रिब्यूनल निष्क्रिय नहीं होने चाहिए। अदालत ने केंद्र सरकार से सभी न्यायाधिकरणों के लिए एक समान व्यवस्था तैयार करने को कहा था। कोर्ट का मानना है कि इन संस्थाओं का प्रभावी ढंग से काम करना न्याय व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।

पुराने नियमों पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन प्रावधानों को पहले असंवैधानिक मानते हुए रद्द किया गया था, उन्हें केंद्र सरकार ने मामूली बदलाव के साथ फिर से लागू कर दिया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने यह भी कहा कि फिलहाल यह विधेयक संसद के मानसून सत्र के एजेंडा में शामिल नहीं है। इस पर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि सरकार इसे लाने की पूरी कोशिश करेगी।

पहले भी रद्द हो चुके थे नियम

नवंबर 2025 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की पीठ ने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 के कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा था कि ट्रिब्यूनल सदस्यों की नियुक्ति और कार्यकाल से जुड़े नियम सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों के खिलाफ हैं, इसलिए इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता।

राष्ट्रीय आयोग बनाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार महीने के भीतर नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन बनाने का निर्देश भी दिया था। अदालत का कहना था कि यह आयोग ट्रिब्यूनलों में नियुक्ति, प्रशासन और कामकाज को अधिक स्वतंत्र, पारदर्शी और एक समान बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे पूरे देश में बेहतर व्यवस्था लागू की जा सकेगी।

बदल सकती है ट्रिब्यूनल व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि केवल छोटे-छोटे सुधारों से वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। इसके लिए व्यापक और स्थायी बदलाव जरूरी हैं। अगर नया ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक संसद में पेश होकर पारित होता है, तो देशभर के न्यायाधिकरणों की कार्यप्रणाली, नियुक्ति प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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Author: The Hindi Post