अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। दोनों देशों के बीच हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।
ट्रंप का बड़ा बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले लेनी चाहिए। एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका इस अहम समुद्री रास्ते की सुरक्षा करेगा, तो इसका फायदा उठाने वाले देशों को इसकी कीमत भी चुकानी चाहिए। ट्रंप ने इसे “जलडमरूमध्य का रक्षक” बनने जैसा कदम बताया।
ईरान ने बंद किया समुद्री रास्ता
ईरान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रोक दी है। तेहरान का कहना है कि जब तक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल नहीं होती, तब तक नए परमिट जारी नहीं किए जाएंगे। ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने भी चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका का सैन्य दखल जारी रहा, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
मिसाइल हमलों से बढ़ा संकट
सोमवार को दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आईं। ईरान का दावा है कि उसने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिसका असर कीमतों पर भी देखा जा रहा है।
60 दिन का समझौता टूटा
यह नया संघर्ष उस अंतरिम समझौते के टूटने के बाद सामने आया है, जिसमें दोनों देशों ने 60 दिनों तक शांति बनाए रखने और बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई थी। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने समझौते का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि पहले भी कई बार समझौते टूट चुके हैं और अब अमेरिका सख्त रुख अपनाएगा।
दुनिया की बढ़ी चिंता
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापारिक मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव पूरी दुनिया की चिंता का कारण बना हुआ है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के अगले कदम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।