सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन पितरों को समर्पित होता है और इस दिन स्नान, तर्पण, पिंडदान तथा दान-पुण्य करने की परंपरा है। मान्यता है कि इन कार्यों से पितृ प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि और उन्नति का आशीर्वाद देते हैं। इस साल आषाढ़ अमावस्या मंगलवार को पड़ रही है, इसलिए इसे भौमवती अमावस्या कहा जाएगा।
कब है भौमवती अमावस्या?
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई को मनाई जाएगी। मंगलवार के दिन पड़ने के कारण इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पूजा-पाठ, दान और विशेष उपायों से जीवन की कई परेशानियां दूर हो सकती हैं और शुभ फल प्राप्त होते हैं।
पितरों का करें तर्पण
भौमवती अमावस्या के दिन सुबह स्नान के बाद पितरों का तर्पण करना शुभ माना जाता है। तर्पण करते समय श्रद्धा के साथ पितरों का स्मरण करें और उन्हें जल अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। साथ ही जीवन में उन्नति और सुख-शांति का मार्ग खुलता है।
हनुमान जी की करें पूजा
इस दिन हनुमान जी की पूजा करना भी बेहद शुभ माना जाता है। हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें तथा उनके मंत्रों का जाप करें। मान्यता है कि इससे मंगल और केतु से जुड़े दोष शांत होते हैं और व्यक्ति को साहस, सफलता तथा मानसिक शांति मिलती है।
लड्डू और चोला करें अर्पित
भौमवती अमावस्या पर हनुमान जी को बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। इसके बाद प्रसाद को जरूरतमंद लोगों में बांट दें। शाम के समय हनुमान मंदिर में चमेली के तेल का दीपक जलाकर पीले सिंदूर से चोला चढ़ाना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ
अगर आर्थिक परेशानियां या कर्ज से जुड़ी समस्या बनी हुई है, तो इस दिन ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करना लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ इस स्तोत्र का पाठ करने से आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। हालांकि इन उपायों को धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत विश्वास के आधार पर ही माना जाता है।