कई माता-पिता बच्चों को आसानी से दवा पिलाने के लिए उसे दूध में मिलाकर दे देते हैं। उन्हें लगता है कि इससे बच्चा बिना परेशानी के दवा पी लेगा। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका हमेशा सही नहीं होता। कुछ मामलों में ऐसा करने से दवा का असर कम हो सकता है और इलाज भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए बच्चों को दवा देने का सही तरीका जानना बेहद जरूरी है।
डॉक्टर ने क्या कहा?
जयपुर के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट पीडियाट्रिक विशेषज्ञ डॉ. सन्नी लोहिया के अनुसार, बच्चों को दवा दूध में मिलाकर नहीं देनी चाहिए। उनका कहना है कि कुछ दवाएं दूध के साथ मिलकर ठीक तरह से शरीर में अवशोषित (एब्जॉर्ब) नहीं हो पातीं। इससे दवा का असर कम हो सकता है और बच्चा उम्मीद के मुताबिक जल्दी ठीक नहीं हो पाता।
पूरा डोज भी नहीं मिल पाता
अगर बच्चा दूध पूरा नहीं पीता, तो उसके साथ मिली दवा की पूरी मात्रा भी शरीर तक नहीं पहुंचती। ऐसे में डॉक्टर द्वारा तय की गई सही खुराक बच्चे को नहीं मिलती। इसका असर इलाज पर पड़ सकता है और बीमारी ठीक होने में ज्यादा समय लग सकता है। इसलिए दवा हमेशा उसी तरीके से दें, जैसा डॉक्टर या दवा के निर्देश में बताया गया हो।
दूध से भी हो सकती है दूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दवा का स्वाद दूध में मिल जाए और बच्चे को वह पसंद न आए, तो वह आगे चलकर दूध पीने से भी कतराने लग सकता है। इससे बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतें भी प्रभावित हो सकती हैं। अगर बच्चे को दवा पीने में परेशानी हो रही है, तो अपने पीडियाट्रिशन से सलाह लेकर कोई दूसरा सुरक्षित विकल्प अपनाना बेहतर होता है।
ये गलतियां भी पड़ती हैं भारी
कई बार माता-पिता बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चों को दवा दे देते हैं। जैसे मामूली सर्दी-जुकाम में खुद से कफ सिरप देना, बड़ों की दवा आधी करके खिलाना, एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल करना या दवा का पूरा कोर्स बीच में छोड़ देना। ये सभी आदतें बच्चे की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं और भविष्य में गंभीर समस्याएं भी पैदा कर सकती हैं।
डॉक्टर की सलाह सबसे जरूरी
बच्चों को दवा हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दें। हाल के समय में बच्चों के कफ सिरप और दूसरी दवाओं को लेकर भी नियम सख्त किए गए हैं, ताकि बिना डॉक्टर की सलाह के इनका गलत इस्तेमाल न हो। अगर आप भी बच्चे को दूध में दवा मिलाकर देते हैं, तो इस आदत को बदलना बेहतर होगा। सही तरीके से दी गई दवा ही इलाज को प्रभावी बनाती है।