आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम का दबाव, जिम्मेदारियां और लगातार तनाव आम बात हो गई है। ज्यादातर लोग अपनी शारीरिक सेहत का तो ध्यान रखते हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं। लंबे समय तक तनाव में रहना, कम सोना और आराम न करना दिमाग की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि कई लोगों का दिमाग उम्र से पहले बूढ़ा होने लगता है।
खराब रूटीन बढ़ा रहा है खतरा
रात की शिफ्ट, लंबे समय तक काम करना और रोज़ाना का बिगड़ा हुआ रूटीन शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी (सर्केडियन रिदम) को प्रभावित करता है। इसका असर सीधे दिमाग पर पड़ता है। ऐसे लोगों में ध्यान लगाने में परेशानी, याददाश्त कमजोर होना और सही फैसले लेने की क्षमता कम होने जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। लगातार ऐसा होने पर दिमाग की सेहत धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है।
एक्सपर्ट ने क्या कहा?
कैलाश दीपक हॉस्पिटल के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. बिपन कुमार शर्मा के अनुसार, उम्र बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन दिमाग कितनी तेजी से बूढ़ा होगा, यह काफी हद तक हमारी लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहता है, पर्याप्त नींद नहीं लेता और लगातार काम करता रहता है, तो इसका असर दिमाग पर समय से पहले दिखाई देने लग सकता है।
तनाव कैसे पहुंचाता है नुकसान?
जब शरीर लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो स्ट्रेस हार्मोन लगातार बनते रहते हैं। इससे दिमाग के उन हिस्सों पर असर पड़ सकता है जो याददाश्त, सीखने की क्षमता और निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसके अलावा लंबे समय तक तनाव शरीर में सूजन भी बढ़ा सकता है, जो समय के साथ दिमाग की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।
पूरी नींद है सबसे जरूरी
नींद के दौरान दिमाग आराम नहीं करता, बल्कि खुद को रिपेयर करने का काम करता है। इसी समय दिमाग दिनभर जमा हुए बेकार तत्वों को साफ करता है और खुद को अगले दिन के लिए तैयार करता है। रिसर्च के अनुसार, जो लोग लगातार कम नींद लेते हैं, उनमें दिमाग के समय से पहले बूढ़ा होने का खतरा बढ़ सकता है। बेहतर ब्रेन हेल्थ के लिए रोज़ करीब सात घंटे की अच्छी नींद जरूरी मानी जाती है।
ऐसे रखें दिमाग को हेल्दी
अच्छी बात यह है कि कुछ आसान आदतें अपनाकर दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है। रोज़ पर्याप्त नींद लें, तनाव कम करने के लिए योग, मेडिटेशन या हल्की एक्सरसाइज करें और काम के बीच खुद को आराम देने का समय जरूर निकालें। संतुलित जीवनशैली न सिर्फ दिमाग को स्वस्थ रखती है, बल्कि याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता भी बेहतर बनाए रखने में मदद करती है।