अयोध्या का राम मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के दान में कथित चोरी का मामला है। पहले इस तरह की गड़बड़ी से इनकार किया गया, लेकिन बाद में एफआईआर दर्ज हुई, कुछ लोगों की गिरफ्तारी हुई और चोरी की रकम भी बरामद होने की बात सामने आई। इसके बाद मामला और गंभीर हो गया।
चंपत राय पर क्यों उठे सवाल?
राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर सीधे चोरी का आरोप नहीं है, लेकिन जिन लोगों पर दान चोरी का आरोप लगा है, उन्हें उनका करीबी बताया जा रहा है। आरोप है कि इन लोगों की नियुक्ति भी उनकी सिफारिश पर हुई थी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी गड़बड़ी उनकी जानकारी के बिना कैसे होती रही।
कैसे सामने आया मामला?
7 जून को समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय ने दान चोरी का आरोप लगाया। अगले दिन अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर यह मुद्दा उठाया। शुरुआत में ट्रस्ट ने सभी आरोपों को खारिज किया, लेकिन बाद में उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया। जांच के बाद 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई और कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
किन लोगों पर लगा आरोप?
एफआईआर में जिन लोगों के नाम सामने आए, उनमें राम शंकर यादव, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्रा, रमा शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और मनीष यादव शामिल हैं। आरोप है कि ये सभी मंदिर में आने वाले दान की गिनती से जुड़े काम करते थे और इसी दौरान कथित तौर पर गड़बड़ी हुई।
कौन हैं चंपत राय?
चंपत राय लंबे समय से विश्व हिंदू परिषद और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं। वह कभी केमिस्ट्री के शिक्षक थे, लेकिन बाद में राम जन्मभूमि आंदोलन का अहम चेहरा बन गए। अदालतों में चल रहे मामलों से लेकर मंदिर निर्माण तक उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसी वजह से उनकी पहचान राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकारों में होती है।
ट्रस्ट और राजनीति दोनों घिरे
दान चोरी का मामला सामने आने के बाद विपक्ष ने बीजेपी और राम मंदिर ट्रस्ट को घेरना शुरू कर दिया। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। वहीं ट्रस्ट की साख पर भी असर पड़ा है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह सिर्फ कुछ कर्मचारियों की करतूत थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था।
क्या पड़ेगा राजनीतिक असर?
राम मंदिर बीजेपी के सबसे बड़े राजनीतिक और वैचारिक मुद्दों में से एक रहा है। ऐसे में दान चोरी का मामला पार्टी के लिए भी चुनौती बन सकता है। अगर जांच में और बड़े खुलासे होते हैं, तो विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बना सकता है। इससे राम मंदिर ट्रस्ट के साथ-साथ सरकार की छवि पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
आस्था पर लगा बड़ा सवाल
राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान में चोरी की खबर ने श्रद्धालुओं को निराश किया है। भगवान राम के प्रति लोगों की श्रद्धा पर कोई असर नहीं है, लेकिन मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता पर सवाल जरूर खड़े हुए हैं। अब सभी की नजर जांच के नतीजों पर है कि दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और ट्रस्ट अपनी विश्वसनीयता कैसे वापस हासिल करता है।