1 जुलाई 2017 को लागू हुआ वस्तु एवं सेवा कर (GST) आज अपने नौ साल पूरे कर चुका है। इसे भारत के सबसे बड़े टैक्स सुधारों में से एक माना जाता है। GST लागू होने से पहले वैट, एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स और कई राज्य स्तरीय टैक्स अलग-अलग थे। नई व्यवस्था ने इन सभी को एक सिस्टम में जोड़कर पूरे देश में एक समान अप्रत्यक्ष कर प्रणाली लागू की।
शुरुआत में आई थीं चुनौतियां
GST लागू होने के शुरुआती समय में कारोबारियों और व्यापारियों को नई व्यवस्था समझने और अपनाने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि समय के साथ सरकार ने नियमों में कई बदलाव किए और तकनीकी सिस्टम को भी बेहतर बनाया। इसका असर यह हुआ कि धीरे-धीरे कारोबारियों का भरोसा बढ़ा और अब GST देश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है।
लगातार बढ़ रहा टैक्स कलेक्शन
GST लागू होने के बाद टैक्स कलेक्शन में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। आज देश में 1.65 करोड़ से ज्यादा GST रजिस्टर्ड टैक्सपेयर्स हैं। अब तक 192.73 करोड़ से अधिक रिटर्न दाखिल किए जा चुके हैं और 778 करोड़ से ज्यादा ई-वे बिल जारी हुए हैं। जून 2026 में शुद्ध GST कलेक्शन 1.62 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि अप्रैल 2026 में 2.42 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड मासिक संग्रह दर्ज किया गया।
कारोबारियों का बढ़ा भरोसा
हालिया सर्वे के मुताबिक, 99 फीसदी से ज्यादा कंपनियों ने GST के साथ अपने अनुभव को सकारात्मक या सामान्य बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि GST काउंसिल की ओर से समय-समय पर किए गए सुधारों से टैक्स सिस्टम ज्यादा पारदर्शी और आसान हुआ है। इसके साथ ही देश में कारोबार करना भी पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हुआ है।
अगली बैठक से बड़ी उम्मीदें
अब उद्योग जगत की नजर GST काउंसिल की अगली बैठक पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के नियमों को आसान बनाने, छोटे कारोबारियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया सरल करने और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर जैसी समस्याओं पर अहम फैसले लिए जा सकते हैं। डिजिटल सिस्टम को और मजबूत बनाने पर भी जोर रहने की उम्मीद है।
आगे और सुधार की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले नौ वर्षों में GST ने भारत की टैक्स व्यवस्था को नई दिशा दी है। हालांकि अभी भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जहां सुधार की जरूरत है। नियमों को और आसान बनाना, टैक्स विवादों का जल्दी समाधान करना और कारोबारियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाना आने वाले समय की बड़ी प्राथमिकताएं मानी जा रही हैं।