राम मंदिर दान चोरी मामले में पहली बड़ी कार्रवाई हो गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर अयोध्या थाने में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें छह कैशियर भी शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के घरों पर छापेमारी की और सभी को हिरासत में ले लिया, जबकि अनुकल्प मिश्र और लवकुश मिश्र को गिरफ्तार भी कर लिया गया है।
एसआईटी रिपोर्ट के बाद बड़ा कदम
यह कार्रवाई एसआईटी की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद हुई है। सूत्रों के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में कुछ आरोपी चोरी करते और उनकी मदद करते हुए दिखाई दिए हैं। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। इस एफआईआर में मंदिर ट्रस्ट के बड़े नामों का जिक्र नहीं है, लेकिन जांच का दायरा आगे बढ़ सकता है।
गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ केस
आरोपियों पर आपराधिक न्यासभंग, चोरी की संपत्ति रखने, साजिश रचने और सामूहिक अपराध जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें कुछ धाराओं में आजीवन कारावास या 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। अब पुलिस को आरोपियों से पूछताछ, बैंक खातों और संपत्तियों की जांच करने का कानूनी अधिकार भी मिल गया है।
आस्था से जुड़ा है पूरा मामला
यह मामला केवल पैसों की गड़बड़ी का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। रामलला के चरणों में चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी को ट्रस्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है। यही वजह है कि किसी बाहरी शिकायत का इंतजार किए बिना ट्रस्ट ने खुद आगे आकर एफआईआर दर्ज कराई।
लगातार सामने आ रहे थे सबूत
पिछले कुछ दिनों से इस मामले में कई दस्तावेज और नए आरोप सामने आ रहे थे। इन्हीं खुलासों के बाद ट्रस्ट ने साफ संदेश दिया है कि दान और श्रद्धालुओं के भरोसे के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच की आंच आगे किन-किन लोगों तक पहुंचेगी।
वीएचपी ने उठाईं चार बड़ी मांगें
उधर, विश्व हिंदू परिषद इस मुद्दे पर आक्रामक नजर आ रही है। अयोध्या में हुई बैठक में वीएचपी ने चार बड़ी मांगें रखीं। संगठन ने मामले की तेज जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी कहा कि चोरी करने वालों को जेल भेजा जाना चाहिए।