अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। स्विट्जरलैंड में हुई हाई-लेवल बातचीत के बाद दोनों देश 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते के लिए एक रोडमैप तैयार करने पर सहमत हुए हैं। इस बातचीत में कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और इसे सकारात्मक शुरुआत बताया गया है।
14 सूत्रीय समझौते पर बनी सहमति
17 जून को दोनों देशों के बीच 14 बिंदुओं वाले एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते का मकसद वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव कम करना और आगे की बातचीत का रास्ता तैयार करना है। यह सहमति स्विट्जरलैंड के लेक ल्यूसर्न में करीब 18 घंटे चली मैराथन बैठक के बाद बनी।
अमेरिका ने दी तेल कारोबार में राहत
बातचीत के बाद अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान को 60 दिनों की विशेष राहत दी है। इसके तहत 21 अगस्त तक ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन, डिलीवरी और बिक्री की अनुमति दी गई है। इसे दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
ईरान ने किए महत्वपूर्ण वादे
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के अनुसार, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को देश में प्रवेश की अनुमति देने का वादा किया है। इससे परमाणु कार्यक्रम को लेकर बनी चिंताओं को कम करने की कोशिश की जा रही है।
नई कमेटी और संचार तंत्र बनेगा
बातचीत के दौरान एक हाई-लेवल कमेटी और डायरेक्ट कम्युनिकेशन चैनल बनाने पर भी सहमति बनी है। यह कमेटी अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने की प्रक्रिया की निगरानी करेगी। इसके अलावा परमाणु मुद्दों, प्रतिबंधों और समझौते के क्रियान्वयन पर अलग-अलग कार्य समूह भी बनाए जाएंगे।
लेबनान के लिए बनेगा डी-कॉन्फ्लिक्टेशन सेल
संयुक्त बयान में लेबनान में जारी तनाव को कम करने के लिए एक “डी-कॉन्फ्लिक्टेशन सेल” बनाने की घोषणा भी की गई है। इसका उद्देश्य इजराइल के सैन्य अभियान को समाप्त करने और क्षेत्रीय तनाव को कम करने में मदद करना है। इसके लिए दोनों पक्ष लगातार संपर्क में रहेंगे।
अब भी कई मुद्दे बाकी
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी बातचीत का अगला चरण काफी चुनौतीपूर्ण होगा। अभी भी कई बड़े सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं, जैसे ईरान को यूरेनियम संवर्धन की अनुमति मिलेगी या नहीं, उसके मौजूदा यूरेनियम भंडार का क्या होगा और प्रतिबंधों में राहत कब तक दी जाएगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर खास नजर
दोनों देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की गलतफहमी या टकराव से बचने के लिए एक विशेष संचार लाइन बनाने का फैसला किया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के करीब पांचवें हिस्से के तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में शांति बनाए रखना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी जरूरी है।