भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 12 जून को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) 9.98 अरब डॉलर घटकर 671.62 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले वाले सप्ताह में भी रिजर्व में 71.1 करोड़ डॉलर की कमी दर्ज की गई थी। लगातार दूसरे सप्ताह आई गिरावट ने बाजार और निवेशकों का ध्यान खींचा है। हालांकि कुल भंडार अभी भी मजबूत स्तर पर बना हुआ है।
विदेशी मुद्रा आस्तियों में बढ़त
कुल रिजर्व में कमी के बावजूद विदेशी मुद्रा आस्तियों (FCA) में बढ़ोतरी दर्ज की गई। समीक्षाधीन सप्ताह में यह 84.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 544.29 अरब डॉलर पर पहुंच गई। विदेशी मुद्रा आस्तियों में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य प्रमुख मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल होता है। यही वजह है कि कुल रिजर्व और एफसीए के आंकड़ों में अलग-अलग रुझान देखने को मिल सकते हैं।
गोल्ड रिजर्व ने बढ़ाई चिंता
इस अवधि में सबसे बड़ी गिरावट स्वर्ण भंडार (Gold Reserve) में देखने को मिली। आरबीआई के मुताबिक, गोल्ड रिजर्व का मूल्य 10.75 अरब डॉलर घटकर 103.82 अरब डॉलर रह गया। वहीं, विशेष आहरण अधिकार (SDR) 6.6 करोड़ डॉलर घटकर 18.69 अरब डॉलर पर आ गए। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की आरक्षित कोष स्थिति भी मामूली घटकर 4.81 अरब डॉलर रह गई। गोल्ड रिजर्व में आई बड़ी कमी विदेशी मुद्रा भंडार के कुल आंकड़े पर भारी पड़ी।
अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है रिजर्व?
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। इसका उपयोग आयात भुगतान, विदेशी कर्ज चुकाने और रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। आरबीआई पहले ही पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं को लेकर सतर्कता जता चुका है। हालांकि हालिया गिरावट के बावजूद 671 अरब डॉलर से अधिक का फॉरेक्स रिजर्व भारत को वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है और निवेशकों का भरोसा बनाए रखने में मदद करता है।