Hormuz Strait खुलते ही भारत को राहत! तेल-गैस सप्लाई पटरी पर लौटने की तैयारी, कब खत्म होगी संकट की चिंता?

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बाद दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। सबसे पहले इस क्षेत्र से अमेरिकी नाकाबंदी हटाई जाएगी। इसके बाद ईरान समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को साफ करेगा। इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

भारत के लिए क्यों है अहम?

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात करता है। इसके अलावा देश में आने वाली बड़ी मात्रा में एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) भी कतर से इसी मार्ग के जरिए पहुंचती है। ऐसे में होर्मुज का खुलना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कतर ने शुरू की गैस सप्लाई तैयारी

रिपोर्ट्स के अनुसार कतर ने अपने प्रमुख रास लाफान टर्मिनल से गैस निर्यात की प्रक्रिया फिर से तेज कर दी है। तेल और गैस टैंकरों को फारस की खाड़ी में बुलाया जा रहा है। अनुमान है कि अगले 60 दिनों के भीतर कतर गैस सप्लाई को युद्ध से पहले वाले स्तर पर पहुंचाने में सफल हो सकता है। इससे भारत को गैस आपूर्ति में राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है।

पूरी तरह साफ होने में लग सकता है समय

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज के समुद्री रास्ते को पूरी तरह सुरक्षित बनाने में समय लग सकता है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक बारूदी सुरंगों की सफाई में कई महीने लग सकते हैं, जबकि कई जानकारों का कहना है कि कम से कम 30 दिनों में बड़े स्तर पर आवाजाही सामान्य हो सकती है। फिलहाल छोटे टैंकरों की आवाजाही शुरू हो चुकी है, जो सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

ईरान भी बढ़ाएगा तेल निर्यात

समझौते के बाद ईरान पर लगे कई प्रतिबंधों में राहत मिलने की खबर है। ऐसे में ईरान वैश्विक बाजार में अपने विशाल तेल भंडार को उतारने की तैयारी कर सकता है। बताया जा रहा है कि उसके पास बड़ी मात्रा में कच्चा तेल मौजूद है, जिसे बेचकर वह निर्यात बढ़ा सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई मजबूत होगी और कीमतों पर दबाव कम पड़ सकता है।

भारत को मिल सकती है बड़ी राहत

होर्मुज मार्ग के धीरे-धीरे सामान्य होने और ईरान से संभावित आपूर्ति बढ़ने का सीधा फायदा भारत को मिल सकता है। इससे तेल और गैस की उपलब्धता बेहतर होगी, आयात लागत घट सकती है और भविष्य में पेट्रोल, डीजल व गैस की कीमतों पर भी राहत देखने को मिल सकती है। हालांकि अंतिम स्थिति समझौते के सफल क्रियान्वयन और क्षेत्रीय हालात पर निर्भर करेगी।

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Author: The Hindi Post