एयर इंडिया अब अपनी तेज विस्तार योजनाओं की रफ्तार कम करने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी की मालिक टाटा ग्रुप ने फिलहाल नए विस्तार की बजाय घाटा कम करने और मौजूदा संचालन को मजबूत बनाने पर जोर देने को कहा है। इसके तहत उड़ानों की संख्या, नए रूट्स और भविष्य की निवेश योजनाओं की समीक्षा की जा रही है। कंपनी का लक्ष्य पहले वित्तीय स्थिति को स्थिर करना और फिर आगे की रणनीति तय करना है।
500 विमानों की डिलीवरी टालने की चर्चा
रिपोर्ट्स के अनुसार, एयर इंडिया एयरबस और बोइंग के साथ बातचीत कर रही है ताकि पहले से ऑर्डर किए गए करीब 500 विमानों की डिलीवरी को आगे बढ़ाया जा सके। विमान खरीद में सबसे बड़ा भुगतान डिलीवरी के समय करना होता है, जिससे कंपनी पर भारी वित्तीय दबाव पड़ता है। डिलीवरी टालने से एयर इंडिया को नकदी बचाने और खर्चों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। यह कदम कंपनी की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
रूट्स और नई योजनाओं की समीक्षा
एयर इंडिया अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भी दोबारा आकलन कर रही है। कम लाभ देने वाले कुछ रूट्स को बंद किया जा सकता है, जबकि नए रूट्स शुरू करने की योजनाएं फिलहाल टाली जा सकती हैं। इसके अलावा, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानें शुरू करने की योजना पर भी पुनर्विचार किया जा रहा है। कंपनी उन क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देना चाहती है जहां बेहतर कमाई और स्थिर संचालन की संभावना हो।
घाटे और चुनौतियों से बढ़ी चिंता
पिछले कुछ समय में एयर इंडिया को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। विमान हादसे से ब्रांड इमेज प्रभावित हुई, वहीं पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र बंद होने और ईरान क्षेत्र में तनाव के कारण उड़ानों की लागत बढ़ी है। लंबे रूट्स अपनाने से ईंधन खर्च बढ़ा, जबकि कमजोर रुपये ने भी विदेशी भुगतान महंगे कर दिए। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2022 में टाटा ग्रुप द्वारा अधिग्रहण के बाद एयर इंडिया को 550 अरब रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। हालांकि एयर इंडिया ने इन खबरों को अटकलें बताया है और कहा है कि वह अपने बेड़े के आधुनिकीकरण और लंबी अवधि की विकास योजना के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। फिर भी संकेत यही हैं कि फिलहाल कंपनी का फोकस विस्तार से ज्यादा लाभप्रदता और वित्तीय मजबूती पर रहेगा।