भारत और फ्रांस के बीच राफेल लड़ाकू विमानों की नई डील को लेकर बड़ी चर्चा चल रही है। फ्रांसीसी कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित नई राफेल डील पहले हुई खरीद से बेहतर और ज्यादा फायदे वाली हो सकती है। इस बार केवल विमान खरीदने की बात नहीं होगी, बल्कि भारतीय जरूरतों के मुताबिक कई नई सुविधाओं और तकनीकों को भी शामिल किया जा सकता है। खास बात यह है कि राफेल विमानों में भारतीय हथियारों के एकीकरण पर भी सकारात्मक बातचीत चल रही है, जिससे भारतीय वायुसेना की ताकत और बढ़ सकती है।
114 राफेल पर सरकार की नजर
भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव की रक्षा मंत्रालय में समीक्षा होने की उम्मीद है। इस प्रस्ताव को रक्षा खरीद बोर्ड से शुरुआती मंजूरी मिल चुकी है और अब इस पर उच्च स्तरीय बैठक में विस्तार से चर्चा हो सकती है। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास लगभग 30 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन की है। ऐसे में वायुसेना की क्षमता बढ़ाने और सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए यह सौदा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मेक इन इंडिया पर रहेगा जोर
भारत में फ्रांस के राजदूत थियरी माथौ ने कहा है कि भविष्य में होने वाली किसी भी राफेल खरीद में भारत की ‘मेक इन इंडिया’ नीति को प्राथमिकता दी जाएगी। उनका कहना है कि भारत और फ्रांस पहले भी कई रक्षा परियोजनाओं पर साथ काम कर चुके हैं और आगे भी इसी मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। फ्रांस चाहता है कि यह परियोजना भारत की औद्योगिक जरूरतों और रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करे। इससे देश में रोजगार और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिल सकता है।
तकनीक ट्रांसफर पर जारी बातचीत
तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) और स्थानीय उत्पादन को लेकर भी दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। हालांकि फ्रांसीसी राजदूत ने इस पर ज्यादा जानकारी देने से इनकार किया और कहा कि चर्चा अभी शुरुआती चरण में है। उन्होंने इतना जरूर कहा कि अंतिम समझौता भारत की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। वहीं, फ्रांस का मानना है कि राफेल की तुलना दूसरे लड़ाकू विमानों जैसे F-35 और SU-57 से नहीं की जानी चाहिए। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच होने वाली उच्च स्तरीय बैठकों में इस डील को लेकर और स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।