Trump की शांति कोशिशों पर भारी पड़ा युद्ध, इजराइल-ईरान संघर्ष ने मध्य पूर्व को फिर भड़काया

अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां ईरान के साथ शांति वार्ता और संभावित समझौते की बात कर रहे हैं, वहीं जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बता रहे हैं। हालिया सैन्य घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि फिलहाल संघर्ष कम होने के बजाय और तेज होता दिखाई दे रहा है।

इजराइल और ईरान आमने-सामने

रविवार को इजराइल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह से जुड़े ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद ईरान ने इजराइल पर जवाबी हमले किए। जवाब में इजराइल ने भी ईरान के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया। दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्र में तनाव को और गंभीर बना दिया है।

ट्रंप की रणनीति पर सवाल

इन घटनाओं के बाद ट्रंप की कूटनीतिक रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ वे शांति और समझौते की बात कर रहे हैं, दूसरी तरफ उनके करीबी सहयोगी माने जाने वाले इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू सैन्य कार्रवाई जारी रखे हुए हैं। इससे अमेरिका की मध्यस्थता की कोशिशों की प्रभावशीलता पर चर्चा तेज हो गई है।

ईरान के ठिकानों पर हमले

इजराइल ने ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हमले करने का दावा किया है। रिपोर्टों के अनुसार मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, कमांड सेंटर और कुछ औद्योगिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। इजराइल का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है।

ईरान ने दी कड़ी चेतावनी

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने चेतावनी दी है कि यदि इजराइल अपने हमले जारी रखता है तो उसे और सख्त जवाब मिलेगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वे अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाते रहेंगे। इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है।

कूटनीतिक मोर्चे पर सक्रिय ईरान

सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ ईरान कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय है। ईरानी विदेश मंत्री ने कई देशों के नेताओं और अधिकारियों से बातचीत कर क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा की है। ईरान अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने और अपने पक्ष को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका भी हाई अलर्ट पर

संघर्ष बढ़ने के बाद अमेरिका ने भी अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी हैं। क्षेत्र में अमेरिकी निगरानी विमान और ड्रोन सक्रिय बताए जा रहे हैं। वॉशिंगटन ने स्पष्ट किया है कि वह स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर सभी विकल्प खुले हैं।

आगे क्या होगा?

मौजूदा हालात में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तनाव कम होगा या संघर्ष और गहरा जाएगा। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा, जबकि अमेरिका और इजराइल उस पर दबाव बनाए हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

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Author: The Hindi Post