भारतीय खाने की पहचान दाल, रोटी और चावल से होती है। देश के लाखों घरों में आज भी लोग एक ही भोजन में रोटी और चावल दोनों खाते हैं। यह परंपरा वर्षों पुरानी है, लेकिन अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ लोगों के लिए यही आदत स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का कारण बन सकती है। खासकर तब, जब खाने का संतुलन सही न हो।
क्यों बढ़ रही चिंता?
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में डॉक्टर और डाइटिशियन अब खाने की उन आदतों पर भी ध्यान दे रहे हैं जो ब्लड शुगर और मोटापे का जोखिम बढ़ा सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार समस्या किसी एक खाद्य पदार्थ में नहीं, बल्कि उसके सेवन के तरीके और मात्रा में छिपी होती है।
थाली में ज्यादा कार्बोहाइड्रेट
एक सामान्य भारतीय थाली में चावल, रोटी, आलू की सब्जी, दाल, मिठाई और कभी-कभी मीठे पेय भी शामिल होते हैं। इनमें से अधिकांश चीजें कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होती हैं। जब एक ही समय में कई कार्ब स्रोत खाए जाते हैं तो शरीर में ग्लूकोज की मात्रा तेजी से बढ़ सकती है। इसका असर डायबिटीज, प्रीडायबिटीज, मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस से जूझ रहे लोगों पर ज्यादा पड़ता है।
सबसे बड़ी गलती क्या है?
डाइटिशियन दिव्या जैन के अनुसार लोगों की थाली में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा तो अधिक होती है, लेकिन प्रोटीन और फाइबर अक्सर कम रह जाते हैं। कई लोग दो या तीन रोटियों के साथ चावल भी खाते हैं, जबकि दही, पनीर, अंडे, मछली, चिकन या दाल जैसी प्रोटीन वाली चीजें सीमित मात्रा में लेते हैं। वहीं सब्जियां भी पर्याप्त मात्रा में नहीं खाई जातीं।
लाइफस्टाइल ने बढ़ाई परेशानी
पहले के समय में लोग अधिक शारीरिक मेहनत करते थे, जिससे शरीर अतिरिक्त ऊर्जा का उपयोग कर लेता था। लेकिन आज की बैठकर काम करने वाली जीवनशैली, कम शारीरिक गतिविधि और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता चलन स्वास्थ्य जोखिम को बढ़ा रहा है। ऐसे में अधिक कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
कैसी हो संतुलित थाली?
विशेषज्ञों का कहना है कि चावल या रोटी छोड़ने की जरूरत नहीं है। जरूरी यह है कि थाली संतुलित हो। आधी प्लेट में सब्जियां और सलाद रखें, एक चौथाई हिस्से में दाल, पनीर, अंडा, चिकन, मछली या दही जैसे प्रोटीन स्रोत शामिल करें और बाकी एक चौथाई हिस्से में रोटी या चावल रखें। लंबे समय तक असंतुलित खानपान ही डायबिटीज और मोटापे का खतरा बढ़ाता है, इसलिए सही संतुलन बनाए रखना सबसे जरूरी है।