गर्मियों में आइसक्रीम और फ्रोजन डेजर्ट की मांग काफी बढ़ जाती है। लेकिन हाल ही में क्वालिटी वॉल्स के एक बड़े फैसले ने इस विषय पर नई चर्चा शुरू कर दी है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह 2027 तक अपने उत्पादों में पाम ऑयल की जगह डेयरी आधारित सामग्री का इस्तेमाल करेगी। इसके बाद लोगों के बीच यह सवाल फिर उठने लगा है कि आखिर फ्रोजन डेजर्ट और असली आइसक्रीम में क्या अंतर है और इनमें से कौन-सा विकल्प ज्यादा बेहतर है।
फ्रोजन डेजर्ट में क्या होता है
विशेषज्ञों के अनुसार, कई फ्रोजन डेजर्ट में दूध की जगह पाम ऑयल, मिल्क सॉलिड्स और अन्य प्रोसेस्ड सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें सैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक हो सकती है, जो अधिक सेवन करने पर दिल की सेहत को प्रभावित कर सकती है। कुछ उत्पादों में होल मिल्क पाउडर और मिल्क सॉलिड्स भी मिलाए जाते हैं, जिनके बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि इनके अधिक सेवन से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
चीनी और एडिटिव्स भी बढ़ाते हैं चिंता
फ्रोजन डेजर्ट में स्वाद और बनावट बेहतर बनाने के लिए लिक्विड ग्लूकोज, सिंथेटिक फ्लेवर, आर्टिफिशियल रंग, स्टेबलाइजर्स और इमल्सीफायर्स जैसे तत्वों का उपयोग किया जाता है। कई उत्पादों में सोया प्रोटीन और अन्य एडिटिव्स भी शामिल होते हैं। यही वजह है कि इन्हें अक्सर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे खाद्य पदार्थ स्वादिष्ट तो होते हैं, लेकिन इनमें पोषण की मात्रा अपेक्षाकृत कम हो सकती है।
सीमित मात्रा में ही करें सेवन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग और खराब आंत स्वास्थ्य जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। जब लोग इन उत्पादों पर अधिक निर्भर हो जाते हैं, तो वे फल, दूध और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों का सेवन कम कर देते हैं। इसलिए फ्रोजन डेजर्ट का सेवन कभी-कभार और सीमित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है। साथ ही खरीदते समय उत्पाद की सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी जरूर पढ़नी चाहिए।