सनातन धर्म में पंचक के पांच दिनों को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि इन दिनों कुछ शुभ और मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए। पंचक का प्रभाव उसके शुरू होने वाले वार के अनुसार बदलता है। इस बार पंचक शनिवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इसे मृत्यु पंचक कहा जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र में मृत्यु पंचक को अपेक्षाकृत अधिक संवेदनशील और सावधानी बरतने वाला समय माना गया है।
कब से कब तक रहेगा पंचक
पंचांग के अनुसार, मृत्यु पंचक 7 जून की शाम 7 बजकर 3 मिनट से शुरू होगा। इसका समापन 11 जून की सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर होगा। ज्योतिष मान्यताओं के मुताबिक, जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में भ्रमण करता है, तब पंचक का योग बनता है। इस दौरान धार्मिक और पारंपरिक नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
इन कार्यों से करें परहेज
पंचक के दौरान शादी, सगाई, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा घर की छत डलवाना, नया बेड या चारपाई खरीदना अथवा बनवाना भी शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इन कार्यों से घर में अशांति, धन हानि या अन्य परेशानियां बढ़ सकती हैं। वहीं लकड़ी और घास-फूस इकट्ठा करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इसे अग्नि भय से जोड़कर देखा जाता है।
यात्रा और अन्य सावधानियां
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचक काल में दक्षिण दिशा की यात्रा करने से भी बचना चाहिए। माना जाता है कि इस दौरान इस दिशा में यात्रा करने पर बाधाएं या दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है। वहीं यदि पंचक के दौरान किसी व्यक्ति का निधन हो जाए, तो अंतिम संस्कार विशेष नियमों के साथ किया जाता है। परंपरा के अनुसार शांति के लिए पांच प्रतीकात्मक पुतले बनाकर अंतिम संस्कार में शामिल किए जाते हैं। इसलिए पंचक के दौरान सावधानी और धार्मिक नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है।