Iran की पीठ पीछे अजरबैजान ने निभाया इजराइल का साथ! सीमा के पास बेस देकर बढ़ाया तनाव

अमेरिका और इजराइल के साथ संघर्ष के दौरान ईरान अपने कई पड़ोसी देशों को शक की नजर से देख रहा था। अब एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अजरबैजान ने युद्ध के दौरान इजराइल की गुप्त रूप से मदद की। रिपोर्ट के अनुसार, अजरबैजान ने ईरान की सीमा के करीब इजराइल को सैन्य गतिविधियों के लिए जमीन उपलब्ध कराई थी। इस खुलासे ने क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

सीमा के पास बने सैन्य ठिकाने

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान की सीमा से लगभग 60 किलोमीटर दूर इजराइल ने कई सैन्य और खुफिया ठिकाने बनाए थे। इन ठिकानों का इस्तेमाल ईरान से जुड़ी सूचनाएं जुटाने और विभिन्न अभियानों को अंजाम देने के लिए किया गया। कहा गया है कि यहां से ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरणों की भी आवाजाही होती थी, जिससे इजराइल को रणनीतिक बढ़त मिली।

तख्तापलट की भी थी तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, इजराइल को उम्मीद थी कि ईरान के कुछ प्रमुख नेताओं की मौत के बाद देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होंगे। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए कथित तौर पर कुछ सैनिकों और खुफिया अधिकारियों को अजरबैजान में तैनात किया गया था। हालांकि, ईरान में वैसा जनआंदोलन देखने को नहीं मिला, जैसा इजराइल ने अनुमान लगाया था।

विशेष बल भी थे शामिल

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस अभियान में इजराइल के विशेष अभियान बल, हेलिकॉप्टर आधारित यूनिट, बचाव दल और खुफिया एजेंसी मोसाद के अधिकारी भी शामिल थे। बताया गया कि अजरबैजान स्थित ठिकानों से कई ऑपरेशन संचालित किए गए। इनमें ईरान के कुछ महत्वपूर्ण सैन्य और खुफिया अधिकारियों को निशाना बनाए जाने के आरोप भी शामिल हैं।

अजरबैजान ने पहले किया था इनकार

युद्ध के दौरान अजरबैजान ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उसकी भूमि का इस्तेमाल किसी तीसरे देश के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। विदेश मंत्री जयहून बायरामोव ने भी ऐसा ही बयान दिया था। इसके बावजूद रिपोर्ट में लगाए गए दावों ने अजरबैजान की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब ईरान और अजरबैजान के बीच लंबी सीमा साझा होती है।

अजरबैजान ने दावों को बताया झूठा

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अजरबैजान ने रिपोर्ट को पूरी तरह निराधार बताया है। अमेरिका में अजरबैजानी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि उनकी जमीन का इस्तेमाल किसी तीसरे देश के खिलाफ सैन्य अभियान के लिए नहीं किया गया। हालांकि, इस दावे और रिपोर्ट के आरोपों के बीच सच्चाई क्या है, इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

The Hindi Post
Author: The Hindi Post