फाइव आइज देशों की खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन अपने जासूसी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म LinkedIn का इस्तेमाल कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, चीनी खुफिया अधिकारियों ने केवल ब्रिटेन में ही 20 हजार से अधिक लोगों से संपर्क किया है। माना जा रहा है कि चीन अब अमेरिका, कनाडा और अन्य पश्चिमी देशों में भी इसी रणनीति को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। रिपोर्ट में यूरोपीय देशों को सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की सलाह दी गई है।
शी जिनपिंग की रणनीति का हिस्सा
अमेरिका के पूर्व राजनयिक जिम लुईस के मुताबिक, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सत्ता में आने के बाद चीन ने अपने खुफिया नेटवर्क को विस्तार देने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना है कि चीन जासूसी के जरिए अमेरिका और यूरोप पर रणनीतिक बढ़त हासिल करना चाहता है। लुईस के अनुसार, चीन की खुफिया एजेंसियों में लगभग 6 लाख लोग काम करते हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े खुफिया नेटवर्क में से एक माना जाता है। इसी वजह से पश्चिमी देशों में चीन की गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ रही है।
अमेरिका में कई गिरफ्तारी के मामले
एक न्यूज चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में अमेरिका में 140 से अधिक लोगों को चीन के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। हाल ही में कैलिफोर्निया की एक मेयर को भी इसी तरह के आरोपों में हिरासत में लिया गया। चीन की खुफिया गतिविधियों को लेकर अमेरिकी प्रशासन काफी सतर्क है। यही कारण है कि चीन दौरे पर जाने वाले कई अमेरिकी अधिकारियों को अपने निजी फोन और लैपटॉप साथ ले जाने से भी रोका गया था।
नौकरी के बहाने होती है भर्ती
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के एजेंट पहले नौकरी के आकर्षक विज्ञापन जारी करते हैं। ये विज्ञापन LinkedIn और अन्य रोजगार वेबसाइटों पर पोस्ट किए जाते हैं। आवेदन करने वाले लोगों की गहन जांच की जाती है और खासतौर पर सरकार, सेना या संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है। इंटरव्यू के बहाने संपर्क बढ़ाया जाता है और बाद में उन्हें खुफिया गतिविधियों के लिए प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस तरीके से अब तक कितने लोगों की भर्ती की गई है।