सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि को बेहद पवित्र माना जाता है, लेकिन अधिकमास की पूर्णिमा का महत्व और भी ज्यादा होता है। यह खास पूर्णिमा तीन साल में एक बार आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ, जप और तप करने से कई गुना पुण्य फल मिलता है। गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान और जरूरतमंदों को दान देना विशेष फलदायी माना गया है।
कब रखा जाएगा व्रत
पंचांग के अनुसार, अधिकमास पूर्णिमा तिथि 30 मई को सुबह 11 बजकर 57 मिनट से शुरू होगी। चंद्रमा का उदय पूर्णिमा तिथि में होने के कारण व्रत 30 मई को रखा जाएगा। वहीं 31 मई को सूर्योदय के समय भी पूर्णिमा तिथि रहेगी, इसलिए इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व रहेगा। इस दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा और व्रत कथा पढ़ने की भी परंपरा है।
रवि और शिव योग का संयोग
इस बार अधिकमास पूर्णिमा पर दो बेहद शुभ योग बन रहे हैं। रवि योग सुबह 5 बजकर 24 मिनट से दोपहर 1 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि रवि योग में किए गए कार्य शुभ फल देते हैं और दोषों को दूर करते हैं। वहीं शिव योग पूरे दिन और रात रहेगा, जिसे जप, ध्यान और पूजा के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
चंद्र देव को अर्घ्य का समय
अधिकमास पूर्णिमा व्रत के दिन चंद्रमा शाम 6 बजकर 40 मिनट पर उदय होगा। हालांकि चंद्र देव को अर्घ्य देने का सबसे उत्तम समय तब माना जाता है, जब चंद्रमा पूरी तरह आसमान में दिखाई देने लगे। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य देने से कुंडली के चंद्र दोष दूर होते हैं और मानसिक शांति के साथ सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।