Pune जहरीली शराब कांड में बड़ा खुलासा, मेथेनॉल मिलाकर बेची गई शराब, मौतों के बाद पुलिस तंत्र पर गंभीर सवाल

पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में हुए जहरीली शराब कांड की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस अवैध शराब का नेटवर्क पुणे ग्रामीण, पुणे शहर और पिंपरी-चिंचवड़ तक फैला हुआ था। पुलिस के अनुसार, पुणे के उरली कांचन गांव का रहने वाला राधेश्याम प्रजापती कथित तौर पर शराब तैयार करता था।

सप्लाई चेन का खुलासा

जांच में सामने आया कि राधेश्याम प्रजापती तैयार शराब आरोपी योगेश वानखेड़े को देता था। योगेश इस शराब को खरीदकर अलग-अलग अवैध शराब अड्डों तक सप्लाई करता था। पुलिस के मुताबिक, योगेश पहले से शराब तस्करी के मामलों में शामिल रहा है और उसके खिलाफ पहले भी तीन केस दर्ज हैं।

ज्यादा मुनाफे का खतरनाक खेल

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस बार ज्यादा कमाई के लालच में शराब में मेथेनॉल मिलाया गया। मेथेनॉल मिलाने से शराब की मात्रा बढ़ जाती थी और मुनाफा भी ज्यादा होता था। लेकिन इस बार कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा मेथेनॉल मिलाने से शराब जहरीली बन गई, जिससे कई लोगों की मौत हो गई।

कई इलाकों में पहुंची जहरीली शराब

पुलिस जांच में सामने आया कि यह जहरीली शराब फुगेवाड़ी इलाके के अवैध शराब अड्डों तक पहुंचाई गई थी। यहां कर्नेल सिंह विरका और गुरमित सिंह विरका नाम के पिता-पुत्र कथित तौर पर अवैध शराब बेचते थे। इसके अलावा खड़की, वडारवाडी, हडपसर और कालेपडल जैसे इलाकों में भी यही शराब सप्लाई की गई थी।

मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका

अब तक इस मामले में कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पिंपरी-चिंचवड़ में 8 और पुणे में 5 लोगों की मौत दर्ज हुई है। हालांकि स्थानीय लोगों का दावा है कि असली संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। अस्पताल में भर्ती कई मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिनमें कुछ की आंखों की रोशनी तक चली गई है।

पुलिस और विभाग पर सवाल

इस पूरे मामले के बाद पुणे ग्रामीण पुलिस, पुणे शहर पुलिस और पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। जिस इलाके से शराब तैयार हो रही थी, वहां लंबे समय तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य सरकार अब पुलिस और राज्य उत्पादन शुल्क विभाग के अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की तैयारी कर रही है।

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Author: The Hindi Post