Kashi में आखिर क्यों कभी नहीं सोते भगवान शिव? चौंका देगा मोक्ष से जुड़ा ये रहस्य

काशी को दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी माना जाता है। इसे वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह भगवान शिव की प्रिय नगरी है और उनका निवास स्थान भी। कहा जाता है कि काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी हुई है, इसलिए प्रलय के समय भी यह नगरी नष्ट नहीं होती। यहां बाबा विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं और हर दिन लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

काशी में क्यों नहीं सोते शिव?

मान्यता है कि भगवान शिव काशी में कभी विश्राम नहीं करते। पुराणों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण है मृत्यु और मोक्ष। कहा जाता है कि काशी में हर समय किसी न किसी प्राणी की अंतिम यात्रा चलती रहती है। ऐसे में भगवान शिव हमेशा जागते रहते हैं, ताकि किसी भी आत्मा को मोक्ष मिलने में देर न हो। यही वजह है कि काशी को मोक्ष की नगरी भी कहा जाता है।

गरुड़ और स्कंद पुराण का रहस्य

गरुड़ पुराण और स्कंद पुराण में बताया गया है कि काशी में मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति यमराज के अधिकार से मुक्त हो जाता है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव स्वयं मृतक के कान में तारक मंत्र बोलते हैं, जिससे आत्मा को सीधा मोक्ष मिलता है। यही कारण है कि यमराज भी काशी में प्रवेश नहीं करते। शिव जी यहां राजा की तरह नहीं, बल्कि हर आत्मा के मार्गदर्शक बनकर रहते हैं।

काशी को क्यों कहते हैं मुक्ति द्वार?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काशी केवल एक शहर नहीं बल्कि मुक्ति का द्वार है। कहा जाता है कि अगर भगवान शिव यहां विश्राम करने लगें तो मोक्ष का क्रम रुक जाएगा। इसलिए वह इस नगरी में हमेशा जाग्रत रहते हैं। काशी को एक साथ सबसे पवित्र और रहस्यमयी स्थान माना जाता है। यही वजह है कि दुनिया भर से लोग यहां दर्शन और आध्यात्मिक शांति पाने के लिए आते हैं।

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Author: The Hindi Post