Petrol-Diesel के बढ़े दामों ने बढ़ाई टेंशन, मिडिल क्लास की जेब पर पड़ेगा बड़ा असर, अब राशन से लेकर कैब तक सब होगा महंगा

15 मई से देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिली है। गाजियाबाद में पेट्रोल करीब 3 रुपये बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया, जबकि डीजल 91 रुपये के पार चला गया। जानकारों का कहना है कि खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की वजह से भारत में भी ईंधन महंगा हुआ है। इसका असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है।

महंगाई अकेले नहीं आती

पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ना सिर्फ गाड़ी चलाने तक सीमित नहीं रहता। ईंधन महंगा होते ही ट्रांसपोर्ट, खाने-पीने की चीजें और रोजमर्रा का खर्च भी बढ़ने लगता है। यानी लोगों को डबल झटका लगता है। पहले पेट्रोल पंप पर ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं और फिर बाजार में सामान खरीदते समय भी अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। इसका सबसे ज्यादा असर मिडिल क्लास परिवारों पर पड़ता है।

माल ढुलाई होगी महंगी

जानकारों के अनुसार डीजल भारतीय ट्रांसपोर्ट सिस्टम की सबसे बड़ी जरूरत है। ट्रकों के जरिए देशभर में सामान पहुंचाया जाता है। जैसे ही डीजल महंगा होता है, ट्रांसपोर्ट कंपनियां मालभाड़ा बढ़ा देती हैं। इसका असर फैक्ट्री से लेकर मोहल्ले की दुकान तक दिखाई देता है। यानी अब हर सामान की ढुलाई पहले से ज्यादा महंगी हो जाएगी।

बस-ऑटो का किराया बढ़ेगा

पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी इस महंगाई से बच नहीं पाएगा। बस, ऑटो, टैक्सी और कैब सेवाएं सीधे ईंधन की कीमतों पर निर्भर करती हैं। सीएनजी और डीजल महंगा होने का मतलब है कि आने वाले दिनों में किराया बढ़ सकता है। रोज ऑफिस या स्कूल जाने वाले लोगों का मासिक सफर खर्च बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।

राशन और सब्जियां होंगी महंगी

दूध, सब्जियां, फल और राशन जैसी जरूरी चीजें ट्रकों के जरिए शहरों तक पहुंचती हैं। डीजल महंगा होने से इनकी ढुलाई की लागत बढ़ जाती है। खासतौर पर जल्दी खराब होने वाली चीजों पर इसका असर ज्यादा पड़ता है। ऐसे में बाजार में दूध, हरी सब्जियां और फल पहले से ज्यादा महंगे मिल सकते हैं। यानी खाने की थाली का बजट भी अब बढ़ने वाला है।

ऑनलाइन डिलीवरी पर असर

आज ज्यादातर लोग ऑनलाइन फूड और सामान मंगाते हैं। Zomato और Swiggy जैसी कंपनियों के डिलीवरी पार्टनर पेट्रोल पर निर्भर हैं। फ्यूल महंगा होने से डिलीवरी चार्ज और सर्ज प्राइसिंग बढ़ सकती है। कैब और बाइक टैक्सी सेवाओं का किराया भी बढ़ने की संभावना है।

खेती और फैक्ट्री पर दबाव

डीजल महंगा होने से खेती की लागत भी बढ़ जाती है। ट्रैक्टर, पंपसेट और सिंचाई के कई साधन डीजल से चलते हैं। इससे किसानों का खर्च बढ़ेगा और उसका असर खाद्य महंगाई पर दिखाई देगा। दूसरी तरफ फैक्ट्रियों में मशीनें और जनरेटर चलाने की लागत भी बढ़ेगी। कंपनियां इस अतिरिक्त खर्च को सामान के दाम बढ़ाकर पूरा करने की कोशिश करेंगी।

घर का बजट कितना बिगड़ेगा

अगर किसी परिवार की गाड़ी महीने में 50 लीटर पेट्रोल खर्च करती है, तो सिर्फ फ्यूल पर ही 150 रुपये ज्यादा खर्च होंगे। स्कूल वैन का किराया बढ़ने से 300 से 400 रुपये अतिरिक्त खर्च आ सकता है। राशन और सब्जियों पर 250 से 400 रुपये ज्यादा लग सकते हैं। वहीं कैब और डिलीवरी सेवाओं का खर्च अलग बढ़ेगा। कुल मिलाकर एक आम परिवार के मासिक बजट पर 1000 से 1400 रुपये तक का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

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Author: The Hindi Post