India Energy Plan: अब कोयले से बनेगा पेट्रोल-डीज़ल और गैस, भारत की नई योजना बदल सकती है ऊर्जा और तेल का पूरा खेल

केंद्र सरकार अब देश में ही पेट्रोल, डीज़ल और गैस बनाने की बड़ी योजना पर काम कर रही है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इसके लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना लाई जा रही है। इस योजना का मकसद विदेशों से तेल और गैस पर निर्भरता कम करना है। सरकार चाहती है कि भारत अपने संसाधनों से ही ईंधन तैयार करे ताकि भविष्य में किसी वैश्विक संकट का असर देश पर कम पड़े।

कोयले से बनेगा ईंधन

भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े कोयला भंडारों में से एक है। सरकार का कहना है कि देश में इतना कोयला है कि यह करीब 200 साल तक चल सकता है। अब इसी कोयले से गैस, पेट्रोल और डीज़ल बनाने की तैयारी हो रही है। योजना के तहत हर साल 7.5 करोड़ टन कोयले को गैस में बदला जाएगा। इससे करीब 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा और लगभग 50 हजार नई नौकरियां भी बन सकती हैं।

कैसे बनता है पेट्रोल

कोयले से पेट्रोल और डीज़ल बनाने की तकनीक को CTL यानी ‘कोल टू लिक्विड’ कहा जाता है। इसमें सबसे पहले कोयले को बहुत बारीक पीसकर गैसिफायर मशीन में डाला जाता है। वहां तेज गर्मी और दबाव में कोयला गैस में बदल जाता है। इस गैस को ‘सिनगैस’ कहा जाता है। इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन जैसी गैसें होती हैं। बाद में केमिकल प्रोसेस के जरिए यही गैस लिक्विड ईंधन में बदल जाती है।

गैस से लेकर जेट फ्यूल

इस तकनीक से सिर्फ पेट्रोल और डीज़ल ही नहीं, बल्कि CNG, PNG और जेट फ्यूल भी बनाया जा सकता है। खास बात ये है कि इस ईंधन के लिए अलग इंजन की जरूरत नहीं होगी। यानी मौजूदा गाड़ियां भी इससे चल सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ईंधन काफी साफ होता है और इसमें सल्फर कम होने से इंजन पर भी कम असर पड़ता है। दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में यह तकनीक कई सालों से इस्तेमाल हो रही है।

पहले क्यों नहीं हुआ काम

अब तक भारत में यह तकनीक बड़े स्तर पर इस्तेमाल नहीं हो पाई थी क्योंकि भारतीय कोयले में राख ज्यादा निकलती है। पुरानी तकनीक ऐसे कोयले के लिए कारगर नहीं थी। इसके अलावा इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन भी काफी होता था। इसलिए लागत और प्रदूषण दोनों बड़ी चुनौती बने हुए थे। इसी वजह से भारत लंबे समय तक सस्ते आयातित कच्चे तेल पर निर्भर रहा।

नई तकनीक से बढ़ी उम्मीद

अब सरकारी कंपनी BHEL ने भारतीय कोयले के लिए नई तकनीक विकसित की है। इसे PBFG तकनीक कहा जाता है। हैदराबाद में इसका सफल परीक्षण भी किया जा चुका है। साथ ही कार्बन कैप्चर जैसी तकनीकें भी आ गई हैं, जिससे प्रदूषण कम किया जा सकता है। ईरान युद्ध और तेल संकट के बाद दुनिया वैकल्पिक ईंधन की तरफ बढ़ रही है। ऐसे में भारत की यह योजना आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा कदम साबित हो सकती है।

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Author: The Hindi Post