US Blockade से ईरान का सबसे बड़ा तेल केंद्र सूना, ख़ार्ग आईलैंड पर थमा निर्यात और बढ़ा संकट

ईरान का ख़ार्ग आईलैंड उसके कच्चे तेल कारोबार की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। फ़ारस की खाड़ी में मौजूद यह द्वीप ईरान के कुल तेल निर्यात का करीब 90 प्रतिशत संभालता है। देश के अलग-अलग तेल क्षेत्रों से पाइपलाइन के जरिए कच्चा तेल यहां पहुंचाया जाता है और फिर बड़े जहाज़ों में भरकर दुनिया के कई देशों तक भेजा जाता है। युद्ध शुरू होने से पहले यहां हर महीने लगभग 90 से 100 तेल टैंकर आते थे। यानी रोज़ाना तीन से चार जहाज़ तेल लोड करते थे। लेकिन अब कई दिनों से यहां एक भी तेल जहाज़ नहीं पहुंचा, जिससे पूरी दुनिया की नजर इस द्वीप पर टिक गई है।

अमेरिका की समुद्री नाकेबंदी

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मूज़ के बाहर अपनी सख्त समुद्री निगरानी बढ़ा दी है। ओमान की खाड़ी में अमेरिकी युद्धपोत तैनात हैं, जिनका मकसद ईरान के तेल कारोबार को रोकना बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि ईरान से जुड़े जहाज़ों की आवाजाही पर रोक लगाई जा रही है। इसी वजह से तेल टैंकर हॉर्मूज़ गलियारे को पार नहीं कर पा रहे। हालांकि ईरान लगातार इन दावों को खारिज करता रहा है, लेकिन ख़ार्ग आईलैंड के पास जहाज़ों की कमी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इस स्थिति को लेकर चिंता बढ़ रही है।

भरते टैंक और बढ़ती मुश्किल

खबरें हैं कि ख़ार्ग आईलैंड पर बने विशाल तेल टैंक अब लगभग भर चुके हैं। अगर तेल का निर्यात लगातार रुका रहा तो ईरान के सामने भंडारण की बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। कुछ रिपोर्ट्स में तेल रिसाव के दावे भी सामने आए हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। माना जा रहा है कि हालात ऐसे ही रहे तो ईरान को अपने कुछ तेल कुओं का उत्पादन कम करना पड़ सकता है। क्योंकि नए निकाले गए तेल को रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचेगी। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है।

जहाज़ बने चलते-फिरते स्टोरेज

बताया जा रहा है कि ईरान ने अपने कई तेल टैंकरों को अस्थायी स्टोरेज की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। ख़ार्ग आईलैंड से तेल निकालकर इन जहाज़ों में भर दिया गया ताकि द्वीप पर कुछ जगह खाली की जा सके। अब ये जहाज़ फ़ारस की खाड़ी में अलग-अलग जगह खड़े बताए जा रहे हैं। लेकिन अमेरिकी नाकेबंदी के कारण वे आगे नहीं बढ़ पा रहे। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो ईरान के तेल कारोबार को बड़ा झटका लग सकता है। साथ ही वैश्विक तेल बाजार में भी अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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Author: The Hindi Post