Brahma Muhurta का स्नान देता है सुख-समृद्धि, देर से नहाना माना गया अशुभ संकेत, जानिए शास्त्रों के नियम

सनातन धर्म में स्नान को केवल शरीर की सफाई नहीं बल्कि आत्मिक शुद्धि का माध्यम भी माना गया है। हमारे धर्म शास्त्रों में सुबह उठने से लेकर दिनभर की दिनचर्या तक के कई नियम बताए गए हैं। पुराने समय में लोग सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लिया करते थे, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नहाने का कोई निश्चित समय नहीं रह गया है। शास्त्रों के अनुसार गलत समय पर किया गया स्नान जीवन में नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, जबकि सही समय पर स्नान करने से सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। यही वजह है कि स्नान के समय को लेकर धर्म ग्रंथों में विशेष महत्व बताया गया है।

चार प्रकार के स्नान बताए गए

शास्त्रों में स्नान को चार भागों में बांटा गया है। सबसे श्रेष्ठ माना जाता है मुनि स्नान, जो सुबह 4 से 5 बजे के बीच यानी ब्रह्म मुहूर्त में किया जाता है। मान्यता है कि इस समय स्नान करने से बुद्धि तेज होती है और मानसिक शांति मिलती है। सुबह 5 से 6 बजे के बीच किया गया स्नान देव स्नान कहलाता है, जिसे शुभ और लाभकारी माना गया है। इससे यश, धन और सकारात्मक ऊर्जा मिलने की बात कही जाती है। वहीं सुबह 6 से 8 बजे तक का स्नान मानव स्नान माना गया है, जो सामान्य गृहस्थ जीवन के लिए ठीक बताया गया है।

राक्षसी स्नान क्यों माना जाता है अशुभ

धर्म शास्त्रों के अनुसार सुबह 8 बजे के बाद किया गया स्नान राक्षसी स्नान कहलाता है। मान्यता है कि इस समय स्नान करने से जीवन में तनाव, आलस्य और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसे अशुभ माना गया है और कहा जाता है कि इससे दरिद्रता भी आ सकती है। इसके अलावा भोजन करने के बाद स्नान करना भी राक्षसी स्नान की श्रेणी में आता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से शरीर और मन दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि सुबह जल्दी उठकर ही स्नान किया जाए।

स्नान करते समय रखें ये सावधानियां

शास्त्रों में स्नान से जुड़े कुछ जरूरी नियम भी बताए गए हैं। कभी भी दूसरे व्यक्ति के बचे हुए पानी से स्नान नहीं करना चाहिए। यदि कुएं या हैंडपंप पर स्नान करें तो पानी खुद निकालना शुभ माना गया है। पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करने के बाद वहां कपड़े धोने से बचना चाहिए। नहाते समय जल को गंदा करना या उसमें मल-मूत्र त्याग करना अशुभ माना गया है। साथ ही कभी भी निर्वस्त्र होकर स्नान नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि इन नियमों का पालन करने से जीवन में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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Author: The Hindi Post