Gold छोड़ो वरना महंगाई झेलो! PM की अपील के पीछे छिपा है डॉलर, तेल और आर्थिक संकट का बड़ा डर

प्रधानमंत्री की अपील सिर्फ़ सोना कम खरीदने की नहीं, बल्कि देश के डॉलर बचाने की कोशिश है। ईरान युद्ध और वैश्विक तनाव की वजह से कच्चा तेल महंगा हो रहा है। भारत तेल विदेश से खरीदता है, इसलिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। अगर डॉलर और महंगा हुआ तो पेट्रोल-डीजल से लेकर रोजमर्रा की चीज़ें भी महंगी हो जाएंगी।

विदेशी सामान का डबल खर्च

विदेश से कोई भी सामान खरीदने के लिए पहले डॉलर खरीदने पड़ते हैं। फिर उन्हीं डॉलर से सामान खरीदा जाता है। यानी खर्च दो स्तर पर बढ़ता है। अगर तेल का दाम भी बढ़े और डॉलर भी महंगा हो जाए तो भारत को रुपये में बहुत ज्यादा भुगतान करना पड़ता है। यही वजह है कि डॉलर की कीमत बढ़ना बड़ा खतरा माना जाता है।

तेल और चिप्स कम नहीं मंगा सकते

भारत सबसे ज्यादा डॉलर कच्चा तेल, गैस और इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर खर्च करता है। मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी और गाड़ियों में लगने वाली सेमिकंडक्टर चिप्स अभी भारत में बड़े स्तर पर नहीं बनतीं। इसलिए इन्हें विदेश से मंगाना मजबूरी है। इन आयातों को तुरंत कम करना संभव नहीं क्योंकि इससे उद्योग और रोजगार प्रभावित होंगे।

सरकार की नजर अब सोने पर

सोना भारत का तीसरा सबसे बड़ा आयात है। देश का लगभग 10% इंपोर्ट बिल सिर्फ सोने पर खर्च होता है। पिछले साल भारत ने करीब 7200 करोड़ डॉलर का सोना खरीदा। इसका मतलब इतना ही डॉलर बाजार से खरीदना पड़ा। सरकार का मानना है कि अगर लोग एक साल तक सोना कम खरीदें तो हजारों करोड़ डॉलर बचाए जा सकते हैं।

सोना कम खरीदा तो क्या फायदा

अगर सोने की मांग घटेगी तो विदेश से सोना कम मंगाया जाएगा। इससे डॉलर की मांग भी घटेगी और रुपया कमजोर होने से बच सकता है। रुपया मजबूत रहेगा तो तेल और बाकी जरूरी आयात सस्ते पड़ेंगे। सरकार का पूरा फोकस अभी डॉलर को 100 रुपये के पार जाने से रोकने पर है।

2013 जैसी हालत का डर

2012-13 में भारी सोना आयात की वजह से डॉलर 55 रुपये से बढ़कर 68 रुपये तक पहुंच गया था। सरकार को डर है कि अगर फिर वही स्थिति बनी तो महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। हालांकि भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि निवेश और सुरक्षा का प्रतीक भी माना जाता है। इसलिए लोगों को एक साल तक सोना न खरीदने के लिए मनाना आसान नहीं होगा।

The Hindi Post
Author: The Hindi Post