अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का शांति प्रस्ताव कुछ ही घंटों में कमजोर पड़ता दिखा, जब ईरान ने अमेरिकी समझौता ज्ञापन को “रद्दी का टुकड़ा” बताते हुए खारिज कर दिया। इसके बाद दोनों देशों के बीच हालात तेजी से बिगड़ गए। अब खाड़ी क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंका बढ़ती नजर आ रही है।
अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर हमला किया
ईरान के जवाब से नाराज अमेरिका ने कई बड़े सैन्य हमले शुरू कर दिए। सबसे बड़ा निशाना ईरान का बंदर अब्बास पोर्ट बना, जहां नेवल कमांड सेंटर में आग लग गई और कई टर्मिनल तबाह हो गए। इसके अलावा केश्म द्वीप और मिनाब तटीय शहर पर भी हमले किए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक मिसाइल साइलो, रडार सिस्टम और स्पीड बोट के ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह हर हमले का जवाब देने के लिए तैयार है।
अरब देशों की भूमिका पर चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका अकेला नहीं दिख रहा। खबरें हैं कि इजराइल और कुछ अरब देशों ने भी अमेरिका की मदद की। दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने अरब देशों के एयरबेस और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किया, जबकि इजराइल ने सुरक्षा सिस्टम उपलब्ध कराए। वहीं मोसाद की खुफिया जानकारी भी इस्तेमाल होने की बात कही जा रही है। इससे मध्य पूर्व की राजनीति और ज्यादा उलझती दिखाई दे रही है।
युद्धविराम के बीच बढ़ी टकराव की आग
हालांकि आधिकारिक तौर पर युद्धविराम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन दोनों तरफ से लगातार हमले हो रहे हैं। पिछले 48 घंटों में हालात तेजी से बदले हैं। पहले ईरान पर UAE के फुजैरा पोर्ट पर मिसाइल हमले का आरोप लगा, फिर सऊदी अरब और कुवैत ने अमेरिकी सेना को अपने एयरबेस इस्तेमाल करने से रोक दिया। इससे अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच भी तनाव बढ़ गया। ट्रंप प्रशासन को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ा।
नए अमेरिकी हथियारों की हुई टेस्टिंग
रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ने इस सैन्य कार्रवाई के दौरान अपने नए हथियारों की भी टेस्टिंग की। इनमें LUCAS नाम का AI आधारित स्ट्राइक ड्रोन सिस्टम शामिल है, जो रडार पर आसानी से पकड़ में नहीं आता। इसके अलावा डार्क ईगल हाइपरसोनिक मिसाइल का भी इस्तेमाल बताया जा रहा है। यह बेहद तेज रफ्तार से हमला करने और रास्ता बदलने में सक्षम मानी जाती है। माना जा रहा है कि अमेरिका भविष्य के लंबे युद्ध की तैयारी भी परख रहा है।
ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप लगातार वार्ता की बात इसलिए कर रहे हैं ताकि अमेरिका को हथियार तैनात करने और नई रणनीति बनाने का समय मिल सके। लेकिन ईरान ने भी जवाबी रणनीति अपनाकर अमेरिका की योजना को चुनौती दे दी है। अब सवाल यही है कि क्या दोनों देशों के बीच बातचीत संभव होगी या खाड़ी क्षेत्र एक बड़े संघर्ष की तरफ बढ़ रहा है। आने वाले दिन मध्य पूर्व की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।