Tamil Nadu में सत्ता का महासंग्राम, बहुमत से दूर विजय थलापति की बढ़ी मुश्किलें, राज्यपाल की भूमिका पर गरमाई राजनीति

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति पूरी तरह गर्म हो गई है। अभिनेता से नेता बने विजय थलापति की पार्टी TVK ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से अभी दूर है। राज्य में लगातार “बहुमत का आंकड़ा”, “पोस्ट पोल गठबंधन” और “राज्यपाल के अधिकार” जैसे शब्द ट्रेंड कर रहे हैं। हर किसी के मन में यही सवाल है कि आखिर तमिलनाडु का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा।

राज्यपाल से विजय की लगातार मुलाकात

विजय थलापति ने लगातार दूसरे दिन तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की। बताया गया कि दोनों के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। विजय ने 112 विधायकों के समर्थन वाला पत्र राज्यपाल को सौंपा है, जबकि सरकार बनाने के लिए 118 सीटों का आंकड़ा जरूरी है। राज्यपाल ने साफ कहा कि स्थिर सरकार के लिए पूर्ण बहुमत जरूरी होगा। इसी वजह से सरकार गठन को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है।

AIADMK ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

इस बीच AIADMK ने अपने 28 विधायकों को पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में भेज दिया है, जिससे सियासी चर्चाएं और तेज हो गई हैं। तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं। TVK के पास 108 सीटें आई हैं, लेकिन विजय थलापति दो सीटों से जीते हैं। एक सीट छोड़ने के बाद पार्टी का आंकड़ा 107 रह जाएगा। कांग्रेस के 5 विधायकों का समर्थन मिलने के बावजूद TVK बहुमत से 6 सीट पीछे है। ऐसे में छोटे दलों और संभावित गठबंधन पर सबकी नजर बनी हुई है।

गठबंधन पर जारी बयानबाजी

TVK नेता मधर बदरुदीन ने इसे “गरीब जनता की जीत” बताया और कहा कि गठबंधन पर फैसला विजय थलापति खुद करेंगे। वहीं कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने आरोप लगाया कि राज्यपाल बीजेपी की सोच से प्रभावित हैं और विजय को मुख्यमंत्री बनने से रोकने की कोशिश हो रही है। दूसरी तरफ DMK नेता सरवनन अन्नादुरई ने कहा कि 118 सीटों का बहुमत जरूरी है और पार्टी किसी संवैधानिक संकट की स्थिति पैदा नहीं करेगी।

त्रिशंकु विधानसभा में राज्यपाल की भूमिका

जब किसी राज्य में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तब राज्यपाल की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। आमतौर पर सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने का न्योता दिया जाता है। राज्यपाल समर्थन पत्र मांग सकते हैं और बहुमत साबित करने के लिए फ्लोर टेस्ट कराने का निर्देश भी दे सकते हैं। अगर कोई दल बहुमत साबित नहीं कर पाता, तो राज्यपाल राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भी कर सकते हैं।

पुराने उदाहरणों से बढ़ी चर्चा

कर्नाटक 2018 और महाराष्ट्र 2019 जैसे उदाहरणों की चर्चा अब तमिलनाडु में भी हो रही है। कर्नाटक में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बहुमत साबित नहीं कर सकी थी। वहीं महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन और देर रात सरकार गठन ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा किया था। अब तमिलनाडु में भी सुप्रीम कोर्ट के एसआर बोम्मई फैसले का जिक्र हो रहा है, जिसमें कहा गया था कि बहुमत का फैसला विधानसभा के फ्लोर टेस्ट से होगा, न कि सिर्फ राज्यपाल के निर्णय से।

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Author: The Hindi Post