Dravidian Politics का बदलता दौर: DMK-AIADMK वर्चस्व को चुनौती, नई सोच और नए चेहरों से बदलते सत्ता समीकरण

तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति की शुरुआत 1916 की जस्टिस पार्टी से मानी जाती है। यह पार्टी ब्राह्मण वर्चस्व और सामाजिक असमानता के खिलाफ बनी थी। उस समय मद्रास प्रेसिडेंसी में शिक्षा और नौकरियों में असमानता थी, जिसे खत्म करने की मांग उठी।

पेरियार और बड़ा आंदोलन

बाद में पेरियार ई.वी. रामासामी ने सेल्फ-रेस्पेक्ट मूवमेंट शुरू किया। उनका मकसद जाति व्यवस्था खत्म करना, महिलाओं को अधिकार देना और हिंदी थोपने का विरोध करना था। यह आंदोलन धीरे-धीरे सामाजिक क्रांति बन गया और लोगों का समर्थन बढ़ता गया।

DMK और AIADMK का दौर

1949 में DMK बनी, जिसने द्रविड़ विचारधारा को राजनीति में उतारा। बाद में एम. जी. रामचंद्रन ने अलग होकर AIADMK बनाई। इसके बाद से तमिलनाडु की सत्ता इन दोनों पार्टियों के बीच ही घूमती रही।

अब क्यों बदल रहा है समीकरण

समय के साथ DMK और AIADMK पर परिवारवाद और भ्रष्टाचार के आरोप लगे। ऐसे में विजय की TVK नई उम्मीद बनकर सामने आई है। वह पुरानी द्रविड़ सोच को आधुनिक मुद्दों से जोड़कर पेश कर रहे हैं। यही वजह है कि अब तमिलनाडु की राजनीति एक नए बदलाव की ओर बढ़ती दिख रही है।

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Author: The Hindi Post