Healthcare Tips: खून की कमी को न करें नजरअंदाज, एनीमिया बढ़ा सकता है डिमेंशिया का खतरा, स्टडी में सामने आया चौंकाने वाला कनेक्शन

आजकल एनीमिया और डिमेंशिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ही में आई एक स्टडी में इन दोनों के बीच अहम संबंध सामने आया है। रिसर्च के मुताबिक, जिन लोगों में खून की कमी होती है, उनमें याददाश्त से जुड़ी समस्याओं का खतरा ज्यादा हो सकता है। खासतौर पर बढ़ती उम्र के लोगों में यह असर ज्यादा देखा गया। यानी एनीमिया सिर्फ शरीर को ही नहीं, बल्कि दिमाग को भी प्रभावित कर सकता है और इसे हल्के में लेना सही नहीं है।

कैसे बढ़ता है डिमेंशिया का रिस्क

स्टडी में बताया गया है कि एनीमिया की वजह से शरीर में हीमोग्लोबिन कम हो जाता है। इससे दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। लंबे समय तक ऐसा होने पर दिमाग की कोशिकाएं कमजोर हो सकती हैं, जिससे सोचने और याद रखने की क्षमता प्रभावित होती है। यही कारण है कि एनीमिया वाले लोगों में डिमेंशिया का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा पाया गया। हालांकि यह हर व्यक्ति में जरूरी नहीं होता, लेकिन जोखिम जरूर बढ़ जाता है।

रिसर्च में क्या सामने आया

इस स्टडी में 2,000 से ज्यादा बुजुर्गों को शामिल किया गया और करीब 9 साल तक उनका अध्ययन किया गया। जिन लोगों में शुरुआत में एनीमिया था, उनमें आगे चलकर डिमेंशिया के लक्षण ज्यादा देखने को मिले। साथ ही कुछ ऐसे बायोमार्कर्स भी पाए गए, जो अल्जाइमर जैसी बीमारियों से जुड़े होते हैं। ये संकेत देते हैं कि खून की कमी दिमाग में बदलाव ला सकती है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी इस पर और गहराई से रिसर्च की जरूरत है।

क्या करें और कैसे बचें

विशेषज्ञों के अनुसार, एनीमिया को डिमेंशिया का सीधा कारण नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह एक बड़ा रिस्क फैक्टर जरूर है। इसलिए समय पर जांच और इलाज बहुत जरूरी है। आयरन से भरपूर खाना, संतुलित डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने से इस खतरे को कम किया जा सकता है। खासकर बुजुर्गों को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए, ताकि दिमाग और शरीर दोनों स्वस्थ रह सकें।

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Author: The Hindi Post