Varuthini Ekadashi 2026: इस एक व्रत से मिलती है हजारों वर्षों की तपस्या का फल, जानें महत्व, कथा और नियम

वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है, जो इस साल 13 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के वराह अवतार की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। ‘वरुथिनी’ का अर्थ होता है रक्षा करने वाला, इसलिए यह व्रत व्यक्ति को संकटों से बचाने वाला माना गया है। कहा जाता है कि इस व्रत का फल दस हजार वर्षों की तपस्या के बराबर होता है। इस दिन उपवास, दान और पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

राजा मांधाता की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, नर्मदा नदी के तट पर राजा मांधाता तपस्या कर रहे थे। तभी एक जंगली भालू ने उन पर हमला कर दिया और उनका पैर घायल कर दिया। लेकिन राजा विचलित नहीं हुए और भगवान विष्णु का स्मरण करते रहे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान प्रकट हुए और भालू का वध कर दिया। इसके बाद भगवान ने राजा को वरुथिनी एकादशी का व्रत करने का सुझाव दिया, जिससे उनके कष्ट दूर हो सकें।

व्रत से मिला चमत्कारी फल

भगवान के आदेश पर राजा मांधाता ने मथुरा में जाकर पूरी श्रद्धा से यह व्रत किया और भगवान वराह की पूजा की। व्रत के प्रभाव से उनका घायल पैर पूरी तरह ठीक हो गया। इस चमत्कार से प्रसन्न होकर उन्होंने इस व्रत का महत्व दुनिया में फैलाया। तभी से यह परंपरा शुरू हुई और लोग इसे सौभाग्य और मोक्ष देने वाला व्रत मानने लगे। यह कथा सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से हर समस्या का समाधान संभव है।

व्रत में खान-पान के नियम

वरुथिनी एकादशी के दिन सात्विक भोजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन अनाज, दाल और नमक से परहेज किया जाता है। फल, दूध, मेवे और घर पर बने व्रत के व्यंजन जैसे साबूदाना खिचड़ी या कुट्टू के आटे का सेवन करना उचित माना जाता है। बाजार के पैकेट फूड से बचना चाहिए। शुद्ध मन और स्वच्छ भोजन के साथ किया गया व्रत शरीर को ऊर्जा देता है और मन को शांति प्रदान करता है।

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Author: The Hindi Post