झारखंड का जामताड़ा साइबर अपराध के लिए बदनाम रहा है, लेकिन अब कानपुर के कुछ गांव भी उसी राह पर चलते नजर आए। रेउना थाना क्षेत्र के राठी गांव, समाज नगर लक्ष्मणपुर और बड़ेला समेत कई इलाकों से लगातार साइबर ठगी की शिकायतें मिल रही थीं। पुलिस ने इन गांवों को हॉटस्पॉट मानकर निगरानी शुरू की, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
तीन महीने की रेकी के बाद कार्रवाई
कानपुर पुलिस ने करीब तीन महीने तक गुप्त तरीके से जांच की। 6 अप्रैल को पुलिस ने पूरी तैयारी के साथ चारों ओर से गांवों को घेर लिया। इस ऑपरेशन में 17 गाड़ियां, भारी पुलिस बल और महिला पुलिसकर्मी शामिल थीं। छापेमारी के दौरान 20 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 17 आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।
फिल्मी अंदाज में चला ऑपरेशन
पुलिस ने इस कार्रवाई को पूरी तरह फिल्मी स्टाइल में अंजाम दिया। पहले सादी वर्दी में गांवों में घूमकर सबूत जुटाए गए। इसके बाद ड्रोन से इलाके की निगरानी की गई। जब छापा मारा गया तो ड्रोन की मदद से भागते अपराधियों को ट्रैक कर पकड़ा गया। इस रणनीति से पुलिस को बड़ी सफलता मिली।
झोपड़ियों से चल रहा था ठगी का नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, आरोपी खेतों और बागों में झोपड़ियां बनाकर रहते थे ताकि पकड़ में न आएं। यहीं से वे लोगों को फोन कर ठगी करते थे। फर्जी सिम कार्ड और नकली आईडी के जरिए अकाउंट खोलकर पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे। एयरटेल पेमेंट बैंक और फिनो पेमेंट्स बैंक जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा था।
सीमा के कारण पुलिस के लिए चुनौती
ये गांव कानपुर नगर और कानपुर देहात की सीमा पर स्थित हैं, जिससे पुलिस के लिए कार्रवाई मुश्किल हो जाती थी। जैसे ही पुलिस दबाव बनाती, आरोपी सीमा पार कर भाग जाते थे। इसी वजह से पुलिस को सर्जिकल स्ट्राइक जैसी रणनीति अपनानी पड़ी, जिससे एक साथ कई आरोपियों को पकड़ा जा सके।
बेरोजगारी से अपराध तक का सफर
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी पहले तमिलनाडु, गुजरात और दिल्ली की कंपनियों में काम करते थे। वहीं उन्होंने ठगी के तरीके सीखे और गांव लौटकर दूसरों को भी सिखाया। धीरे-धीरे पूरे इलाके के बेरोजगार युवा इस गिरोह से जुड़ गए। रोजाना लाखों की कमाई के लालच में ये लोग वरिष्ठ नागरिकों और सरकारी कर्मचारियों को निशाना बनाते थे।