विकट संकष्टी चतुर्थी का दिन भगवान गणेश जी की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। साल 2026 में यह व्रत 5 अप्रैल को रखा जा रहा है। इस दिन भक्त अपने जीवन की परेशानियों को दूर करने और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखते हैं। ‘विकट’ का अर्थ होता है कठिन बाधाएं, इसलिए इस दिन की पूजा विशेष रूप से संकटों को दूर करने के लिए की जाती है। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा से गणेश जी प्रसन्न होते हैं।
पूजा सामग्री और जरूरी तैयारी
पूजा की शुरुआत के लिए एक साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। स्नान के लिए गंगाजल और पंचामृत का उपयोग करें। पूजा सामग्री में अक्षत, रोली, कलावा और लाल चंदन जरूर शामिल करें। गणेश जी को दूर्वा बहुत प्रिय होती है, इसलिए 21 गांठें अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा कपूर, अगरबत्ती और घी का दीपक पूजा को पूर्ण बनाते हैं।
बप्पा का प्रिय भोग और पूजन विधि
भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाना सबसे उत्तम माना जाता है। इसके साथ ही पान के पत्ते, सुपारी और लौंग भी चढ़ाई जाती है। पूजा के दौरान मंत्रों का जाप और आरती करना जरूरी होता है। यह प्रक्रिया न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी देती है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने का नियम
संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना अधूरा माना जाता है। इसके लिए तांबे या पीतल के पात्र में जल लें और उसमें दूध, अक्षत और सफेद फूल मिलाएं। अर्घ्य देते समय ध्यान रखें कि जल सीधे जमीन पर गिरे। शाम को शांत मन से पूजा और ध्यान करने से मानसिक सुकून मिलता है और जीवन में संतुलन बना रहता है।