1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स सिस्टम लागू होने जा रहा है, जो पुराने 1961 कानून की जगह लेगा. अब वित्तीय वर्ष और आकलन वर्ष का कन्फ्यूजन खत्म कर सिर्फ “टैक्स ईयर” लागू किया जाएगा. यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक की अवधि को टैक्स ईयर माना जाएगा. साथ ही ITR-3 और ITR-4 भरने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है, जिससे टैक्सपेयर्स को राहत मिलेगी.
सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव
नए लेबर कोड लागू होने पर सैलरी स्ट्रक्चर बदल सकता है. अब कंपनियों को बेसिक सैलरी कुल वेतन का कम से कम 50% रखना होगा. इससे PF और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ेगा, लेकिन हाथ में आने वाली सैलरी यानी टेक होम कम हो सकती है. पहले कई कंपनियां बेसिक सैलरी कम रखती थीं, जिससे कर्मचारियों को कम फायदा मिलता था.
फास्टैग और टोल खर्च बढ़ेगा
नेशनल हाईवे पर सफर करना थोड़ा महंगा हो सकता है. फास्टैग का सालाना पास अब 3,000 रुपये से बढ़कर 3,075 रुपये हो जाएगा. यह पास गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए होता है और करीब 1,150 टोल प्लाजा पर मान्य रहेगा. एक बार शुल्क देने के बाद इसे एक साल या 200 टोल क्रॉसिंग तक इस्तेमाल किया जा सकता है.
रेलवे टिकट नियम में बदलाव
रेलवे टिकट कैंसिलेशन के नियम भी बदल गए हैं. अब 24 से 72 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर 25% कटेगा, जबकि 8 से 24 घंटे पहले कैंसिल करने पर 50% पैसा कटेगा. 8 घंटे से कम समय बचने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा. वहीं, यात्री अब ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे, जो बड़ी सुविधा मानी जा रही है.
पैन और क्रेडिट स्कोर नियम
पैन कार्ड बनवाने के नियम सख्त हो गए हैं. अब सिर्फ आधार कार्ड से जन्मतिथि साबित नहीं होगी, इसके लिए अतिरिक्त दस्तावेज देना जरूरी होगा. वहीं, क्रेडिट स्कोर से जुड़े नियम भी बदल रहे हैं. अब बैंक हर हफ्ते लोन डेटा अपडेट करेंगे, जिससे आपका क्रेडिट स्कोर ज्यादा तेजी से अपडेट होगा और लोन मिलने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है.
बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट बदलाव
बैंकों ने एटीएम ट्रांजैक्शन पर नई सीमाएं तय की हैं. मुफ्त ट्रांजैक्शन के बाद हर बार पैसे निकालने पर शुल्क देना होगा. वहीं, डिजिटल पेमेंट को और सुरक्षित बनाने के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है. यानी अब सिर्फ OTP से काम नहीं चलेगा, सुरक्षा के लिए अतिरिक्त वेरिफिकेशन जरूरी होगा.