रूस और ईरान की दोस्ती पिछले कुछ सालों में काफी मजबूत हुई है। दोनों देश पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं, इसलिए एक-दूसरे के करीब आए हैं। आज यह रिश्ता सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्षा, तकनीक और अर्थव्यवस्था जैसे कई क्षेत्रों तक फैल चुका है। बदलते वैश्विक हालात में यह साझेदारी दुनिया के लिए एक बड़ा संकेत बन गई है।
डिफेंस सेक्टर में बढ़ता सहयोग
रूस और ईरान के रिश्ते की सबसे मजबूत कड़ी रक्षा क्षेत्र है। यूक्रेन युद्ध के दौरान ईरान ने रूस को ड्रोन उपलब्ध कराए, जिनका इस्तेमाल हमलों में हुआ। बदले में रूस अब ईरान को आधुनिक हथियार दे रहा है, जिनमें Su-35 लड़ाकू विमान और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। इससे ईरान की सैन्य ताकत पहले से काफी मजबूत हो रही है।
स्पेस और तकनीक में भी साथ-साथ
दोनों देशों का सहयोग अब अंतरिक्ष तक पहुंच चुका है। रूस ने ईरान के लिए ‘खय्याम’ सैटेलाइट लॉन्च किया, जिससे उसकी निगरानी क्षमता बढ़ी है। साथ ही रूस, ईरान के वैज्ञानिकों को ट्रेनिंग भी दे रहा है। इससे ईरान भविष्य में अपने सैटेलाइट और रॉकेट खुद बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह तकनीकी सहयोग दोनों देशों को नई ताकत दे रहा है।
आर्थिक और रणनीतिक गठजोड़ का असर
रूस और ईरान अब आर्थिक मोर्चे पर भी साथ आ गए हैं। दोनों डॉलर के बिना व्यापार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स से व्यापार आसान होगा। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी रूस, ईरान का समर्थन करता है। यह बढ़ती नजदीकी मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन बदल सकती है और अमेरिका-इजरायल जैसे देशों की चिंता बढ़ा सकती है।