पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ करीब सवा दो घंटे लंबी वर्चुअल बैठक की। इस दौरान उन्होंने राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की और साफ किया कि हालात गंभीर हैं, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। पीएम ने “टीम इंडिया” की भावना के साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया।
लॉकडाउन पर साफ संदेश
बैठक में पीएम मोदी ने स्पष्ट कर दिया कि देश में लॉकडाउन लगाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस हालात को संभालने पर है, न कि प्रतिबंध लगाने पर। राज्यों से अपील की गई कि वे जनता में भरोसा बनाए रखें और अनावश्यक डर फैलने से रोकें।
सरकार की प्राथमिकताएं तय
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस समय सरकार की मुख्य प्राथमिकताएं आर्थिक स्थिरता बनाए रखना, एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित करना और सप्लाई चेन को मजबूत रखना हैं। उन्होंने राज्यों को निर्देश दिया कि जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें ताकि आम लोगों को दिक्कत न हो।
एग्रीकल्चर और सप्लाई पर फोकस
पीएम ने कृषि क्षेत्र में एडवांस प्लानिंग की जरूरत पर जोर दिया, खासकर फर्टिलाइज़र के स्टोरेज और वितरण को लेकर। उन्होंने कहा कि बदलते हालात में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूत कोऑर्डिनेशन सिस्टम जरूरी है। तटीय और सीमा वाले राज्यों को शिपिंग और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के लिए तैयार रहने को कहा गया।
मुख्यमंत्रियों का भरोसा
बैठक में अमित शाह, राजनाथ सिंह और निर्मला सीतारमण सहित कई मुख्यमंत्री शामिल हुए। सभी ने केंद्र सरकार के कदमों की सराहना की और भरोसा दिलाया कि उनके राज्यों में पेट्रोल, डीज़ल और LPG की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने केंद्र के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
वैश्विक असर और भारत की चुनौती
पीएम मोदी ने पहले ही संसद में कहा था कि पश्चिम एशिया का संकट बेहद चिंताजनक है और इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत के लिए यह संकट आर्थिक, सुरक्षा और मानवीय तीनों स्तरों पर चुनौती बनकर सामने आया है। खासकर खाड़ी देशों में रह रहे लगभग 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।